हाथरस में जातीय दंगा भड़काने के मामले में गुरुवार को मथुरा कोर्ट में एसटीएफ ने चार्जशीट दाख‍िल की है. एसटीएफ ने इस चार्जशीट में पीएफआई के कुल 8 सदस्यों को आरोपी बनाया गया है. मथुरा कोर्ट ने जांच एजेंसी द्वारा दाखलि चार्जशीट पर संज्ञान ल‍िया है.

चार्जशीट के मुताबिक, 5/10/2020 को स्विफ्ट ड‍िजायर कार में अभियुक्त अतिकुर रहमान , आलम , सिद्धकी कपान, मसूद के पकड़े जाने पर उनके कब्जे से 6 स्मार्टफोन, 1 लैपटॉप, 1717 प्रिंटेड कागज़ों के बंच बरामद किए गए थे. प्रिंटेड कागज़ों में जाति और समुदाय के आधार पर हिंसा भड़काने के स्लोगन लिखे पाए गए और एक बेबसाइट बनाकर भी माहौल खराब करने की कोशिश की गईं. जस्टिस फ़ॉर हाथरस बेबसाइट के जर‍िए से दंगे फैलाने की योजना थी. एसटीएफ ने कहा है क‍ि हमें साक्ष्‍य मिले है की उपरोक्त घटना के पीछे एक आतंकी गिरोह था, जो भारत की अखंडता को खराब करना चाहता था.

इस आतंकी गिरोह को देश और विदेशों से काफी फंडिग की गई थी. पीएफआई के कहने पर भी मथुरा से गिरफ्तार चारो लोग हाथरस जा रहे थे. इसके अलावा साम्प्रदायिक दंगों के अन्य अभियुक्त सरवर अली- कैराना, मुफ्ती शहजाद- गाजियाबाद, मुनीर- कैराना, साजिश- कैराना, फरमान- हापुड़, अहमद परवेज- गाजियाबाद, अकरम- गाजियाबाद, नसीरुद्दीन- बिजनौर, नूर हसन- हापुड़, आवेद- मेरठ, मोहम्मद दानिश- त्रिलोकपुरी, रउफ- केरल, साजिद बिन सईद- दिल्ली, मोहम्मद इलियास- दिल्ली. ये सभी पीएफआई और उसकी अन्य शाखा से जुड़े हुए है.

ये सभी सिद्दीकी कपान के व्हाट्सऐप डेटा, मोबाइल लोकेशन और आरोपी रऊफ शरीफ के बयान से सिंतबर 2020 में पीएफआई की एक सीक्रेट वर्क शॉप में शामिल थे. इस खास वर्कशॉप में इन सभी आरोपियों को अलग-अलग टॉस्क देकर उत्तर प्रदेश में किसी बड़ी आपराधिक वारदात और साम्प्रदायिक घटना की आड़ में हिंसक घटना करवाने की साजिश रची गई थी. इस साजिश के लिए देश और विदेशों से फंडिग आई जिसका इस्तेमाल देशभर में माहोल खराब करने के लिए किया जाना था और आतंकी घटनाओं को अंजाम देने की साजिश रची जा रही थी.लखनऊ से गिरफ्तार इनके साथी आरोपी बरूदीन और फिरोज खान से बरामद विस्फोटक से यह साफ था क‍ि यह सभी आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने में जुटे थे. आरोपियों के कब्जे से बरामद लैपटॉप में आतंकी सगठन सिमी के आतंकियों की स्पीच पाई गई थी. वहीं बरामद गेजेट्स से पीएफआई के ऑफिस मैनेजर कमाल केपी द्वारा एक गुप्त वर्कशॉप सितंबर 2020 में आयोजित किये जाने के सबूत मिले है.

सिद्दीकी कपान की पीएफआई के कई नेताओं से चैट्स पाई गई है, जिसमें दलित व आदिवासी मामलों को तूल देकर सगठन के पक्ष में इस्तेमाल करने के आदेश दिए गए थे. यही नहीं सिद्दीकी कपान द्वारा आतंकी गिलानी को फांसी के पश्चात पोस्टमार्टम के दौरान एम्स की मोर्चरी पर ज्यादा से ज्यादा तादात में भीड़ इकट्ठा करने का मेसजे दिया गया था. चैट्स में पीएफआई के टॉप लीडर्स के निर्देश पर साम्प्रदायिक लेख लिखने की बात भी सामने आई है.

हाथरस कांड का द‍िल्‍ली ह‍िंसा से क्‍या है ल‍िंक?

दिल्ली हिंसा में पीएफआई की फंडिग की जाने के सबूत भी पाए गए. चार्जशीट के मुताबिक, केरल में एक वर्कशॉप की गई थी, जिसमें देश मे माहोल खराब करने दंगे भड़काने की साजिश का तानाबाना बुना गया था. प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिमी के कई पूर्व सदस्य वर्तमान मे पीएफआई और रिहेब इंडिया फाउंडेशन से जुड़े हुए है. पीएफआई नए युवा छात्रों का ब्रेन बॉश पर उन्हें देश विरोधी गतिविधियों में शामिल करने में भी जुटा है. आरोपी दानिश त्रिलोकपुरी से पीएफआई का अध्यक्ष है जो दिल्ली हिंसा का भी आरोपी था. आरोपी रउफ शरीफ के बैंक खाते के आई देश और विदेशी रकम 18 लाख रुपए से शाहीन बाग स्थित दफ्तर का किराया नगद में पिछले 5 साल तक देने ल सबूत भी मिले है.

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