मुजफ्फरपुर। एक तरफ जहां सरकार प्रदेश में बेहतर कानून व्यवस्था और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के होने का दावा कर रही है और बड़ी-बड़ी घोषणाएं कर रही है। वहीं दूसरी तरफ मुजफ्फरपुर का यह मामला उन सभी दावों को खोखला साबित कर रहा है। प्रदेश में सभी मरीजों के लिए एंबुलेंस सेवा मुफ्त करने के ऐलान के 15 दिन बाद ही एक बुजुर्ग महिला के शव को ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिला।

परिजनों ने खूब कोशिश की लेकिन जब किसी अधिकारी ने मदद नहीं की तो मजबूरीवश परिजन वृद्धा के शव को ई-रिक्शा के जरिये काजी मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र स्थित अपने घर ले गए। वहीं जब मामले ने तूल पकड़ लिया तो उपाधीक्षक ने जांच के आदेश दे दिये हैं। यह पूरी घटना बीते सोमवार की है, जब काजी मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र की एक बुजुर्ग महिला की तबीयत खराब हो गई थी। परिजन जैसे-तैसे उन्हें सदर अस्पताल ले गए।

इसी दौरान महिला ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। अस्पताल पहुंचने पर इमरजेंसी वार्ड में मौजूद डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिजन ने अधिकारियों और डॉक्टरों से एंबुलेंस या शव वाहन देने की गुहार लगाई। इमरजेंसी के सामने खड़ी एंबुलेंस के चालक से भी मदद मांगी लेकिन किसी का भी दिल नहीं पसीजा। उसके बाद उसने फोन से अपने मोहल्ले के लोगों से मदद मांगी तो सभी ने उसे किराये पर गाड़ी कर शव लाने की सलाह दी।

मोहल्लेवासियों ने विश्वास दिलाया कि शव पहुंचने के साथ ही गाड़ी वाले को किराया दे दिया जाएगा। इसके बाद मृत महिला के बेटे ने ई-रिक्शा को बुलाया और किसी तरह उसी पर शव को रखकर घर ले गए। आरोप है कि घटना के दौरान सिविल सर्जन अपने कार्यालय में मौजूद थे और शव के जाने के कुछ देर बाद अपने कार्यालय से निकले।

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