नई दिल्ली। कोरोना की दवा बनाने के नाम पर बाबा रामदेव एक बार फिर से विवादों में घिर गए हैं। सिर्फ बाबा रामदेव ही नहीं बल्कि देश के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और विश्व स्वास्थ्य संगठन के एग्जिक्यूटिव बोर्ड के चेयरमैन डॉक्टर हर्षवर्धन को भी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन समेत कांग्रेस पार्टी ने निशाने पर ले लिया है। कांग्रेस ने जहां केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन से इस्तीफे की मांग कर डाली है, वहीं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने भी डॉ. हर्षवर्धन पर सवालों की बौछार कर दी।

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि जिस दवा की विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से कोई प्रमाणिकता नहीं है और दवा निर्माता कंपनी उस दवा को विश्व स्वास्थ्य संगठन से प्रमाणित बताकर झूठ बोलती है, उस दवा की लॉन्चिंग की मौजूदगी में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का होना बहुत शर्मसार करता है।

सुरजेवाला ने कहा जो सूचना ही गुमराह करती हो, जिसकी कोई वैधानिकता नहीं है और जो पूरी तरीके से गलत है, ऐसे में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए। कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा लेकिन यह मोदी सरकार का नया भारत है। ऐसे कार्यक्रम में केंद्र के दो-दो कद्दावर मंत्रियों का होना बताता है कि देश की जनता को कैसे अंधेरे में रखा जा रहा है।

सिर्फ कांग्रेस ही नहीं बल्कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने भी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को आड़े हाथों लिया। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने अपने बयान में कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को ऐसे अवैज्ञानिक तरीके से पुष्ट की गई दवा की लॉन्चिंग के कार्यक्रम में नहीं जाना चाहिए। एसोसिएशन ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से पूछा है कि अगर रामदेव की दवा इतनी ही प्रभावी है, तो देश में 35 हजार करोड़ रुपये खर्च करके वैक्सीनेशन क्यों किया जा रहा है।

देश भर के डॉक्टरों के संगठन आईएमए ने सवाल उठाते हुए यह भी कहा कि रामदेव की यह दवा अगर वैज्ञानिक पद्धति से शोध और एविडेंस बेस्ड है तो उसके प्रमाणों को सामने लाना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बाबा रामदेव के दावों को पूरी तरीके से खारिज कर दिया है। जिसने पतंजलि के विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से दवा की प्रमाणिकता की बात कही थी।

उत्तर प्रदेश के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने बाबा रामदेव पर झूठ बोलने और लोगों को गुमराह करने के लिए दिल्ली पुलिस से कार्रवाई करने की भी मांग की है। शिव प्रताप सिंह ने ट्वीट करते हुए दिल्ली पुलिस को टैग किया है

और कहा है कि यह अंतर्राष्ट्रीय धोखाधड़ी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के नाम पर फर्जी सूचना फैलाई गई और लोगों को गुमराह किया गया। सिंह ने दिल्ली पुलिस से कहा है कि बाबा रामदेव को इस आरोप में गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

19 फरवरी को बाबा रामदेव ने यह कहते हुए कोरोना की दवाई दिव्य कोरोनिल टैबलेट को लांच किया कि इस दवा को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने प्रमाणित किया है।

जब बाबा रामदेव दिल्ली के कांस्टीट्यूशनल क्लब ऑफ इंडिया में इस दवा को लांच कर रहे थे, उस वक्त केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और विश्व स्वास्थ्य संगठन के एग्जीक्यूटिव बोर्ड के चेयरमैन डॉक्टर हर्षवर्धन समेत सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी मौजूद थे।

डब्ल्यूएचओ के प्रमाणन की बात सामने आने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन हरकत में आया और ट्वीट कर जानकारी दी कि ऐसी किसी भी प्रकार की कोई भी दवा को न तो उन्होंने प्रमाणित किया है और न ही दवा के प्रभाव पर उनकी टीम ने प्रमाणित किया है।

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