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Friday, July 30, 2021

कोरोना लॉक डाउन ने बढ़ाई रिक्शा चालकों के समक्ष  बेरोजगारी

बगैर परमिट धारक रिक्शा चालक सरकारी आर्थिक मदद से हुआ वंचित
रिक्शा चालक  परिवारो के सदस्यों के समक्ष लटकी भुखमरी की तलवार
‌बेरोजगारी के  बढ़ते तनाव के कारण ,रिक्शा चालक डूबे नशे के गर्त में

मुंबई‌। एक और जहां राज्य की महाविकास आघाडी सरकार ने कोरोना की दूसरी लहर में मदद के नाम पर राज्य के 7 लाख 15 हजार परमिट धारक रिक्शा चालकों को 1500 रुपए की आर्थिक मदद मुहैया करवाकर ऊंट के मुहं में जीरा डालने का काम किया है ।परिणामस्वरूप दूसरी और राज्य की महाविकास आघाडी सरकार अपनी पिट थप-थापते नहीं थक रही है ।

उल्लेखनीय तौर पर  जमीनी  सच्चाई यह है कि  ,बगैर बैच परमिट धारको रिक्शा ड्राइवरो की संख्या अधिकृत परमिट धारकों से बहुत ज्यादा  होने के चलते  सरकारी  आर्थिक मदद से भी वंचित रहे गये। जिसके कारण बढ़ते आर्थिक चरमराई व्यवस्था के कारण  बढ़ते पारिवारिक , मानसिक तनाव ने रिक्शा चालकों को  नशे के गर्त में डूबा दिया है।जिसके कारण रिक्शा चालकों की आज सबसे अधिक नशेड़ियों की कातर में लाकर खड़ा कर दिया है,जिससे उनका घर टूटने के कगार पर पहुंच चुका है।

परिणाम स्वरूप रिक्शा ड्राइवरों की खस्ता हाल चरमराई आर्थिक स्थिति के कारण न सिर्फ पति पत्नी में झगड़े शुरू हो गये है बल्की नशे की हालत में राह चलते लोगों से लड़ाई झगड़ा कर के घातक हथियारों से लैस होकर  एक दूसरे पर जानलेवा हमले करने से भी परहेज नहीं करते  है। परिणाम  स्वरूप जहां रिक्शा चालकों को अपने  परिवार वालों का पेट भरना मुश्किल हो चला है । जिसके कारण रिक्शा चालकों के परिवार के समक्ष भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके है ।

एक रिक्शा चालक की पत्नी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पहले लोग शराबी हुआ करते थे परंतु आज की तारीख में बटन,सुल्ली का नशा सर चढ़कर बोलता है रिक्शा ड्राइवरों पर ,नशे की हालत में पहले से अपनी गाड़ी की सीट में छुपा कर रखे गये  तेज धारदार घातक हथियारों के वॉर से जान लेने से भी बाज़ नहीं आते।

उसका मुख्य कारण है  ड्रग्स पेड़लरो के सबसे बड़े ग्राहक के तौर पर सबसे अधिक संख्या में आपको रिक्शा ड्राइवर ही मिलेंगे जो दिनभर में बड़ी मुश्किल से  1 हजार रुपए कमाते तो सारा पैसा नशे की खुराक खरीदने में खर्च कर देते है ।जिसके कारण ड्रग्स पेड़लर जहां एक और रिक्शा वालों की कमाई से माला माल हो रहे है ,वहीं दूसरी और रिक्शा चालकों के परिवार फाखे मारने के हालात में पहुंच चुका है ।क्या कभी इन ड्रग्स पेड़लरो पर लोकल पुलिस करवाई कर पायेगी ।

शिवाजीनगर-मानखुर्द विधानसभा क्षेत्र की झोपड़पट्टीयो में बिकने वाले नशे का जहर पूरे हरे भरे खुशाल परिवार को खत्म करने में लगा है ।कब लेगी राज्य की महाविकास आघाडी सरकार रिक्शा चालकों के परिवारों को भुखमरी से उभरने की सुध ,लॉक डाउन खोलकर ।

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