मुम्बई। कोरोना को हल्के(lightly) मे न लीजिए, थोड़ी सी गलती आप को आपके परिवार को मुसीबत मे डाल सकती है।कोरोना से बचे रहना ही समझदारी है, सोशल डिस्टन्स ,सफाई और मास्क का इस्तेमाल जरूरी है।अगर फिर भी कोरोना के सिम्टम्स दिखाई पडे तो खुद को कोरेंटाइन कर डॉक्टर की सलाह तुरंत ले और इलाज शुरुआत करे, न के काढ़े और घर की दवाओं के भरोसे रहकर वक्त बर्बाद करे।करोना से बचने के लिए एहतियात के तौर पर काढा, गरम पानी और स्टीम ठीक है। लेकिन सिम्टम्स दिखाई देने के बाद ये सब कुछ कोई काम का नही है बेकार है।

तीन चार दिन की देरी यानी मौत को गले लगाना।कोरोना का वायरस लंग्स (फेफड़ों) तक पहुँचने पर 24 घंटो मे 80%से 90% लंग्स ख़राब करता है। फिर बचना मुश्किल,यह नौबत किसी पर न आये । उपरोक्त बातें जाने माने समाजसेवी अशफाक खोपेकर ने कही।उन्होंने बताया किहम ने अपने भाई डाॅ.अब्दुल रहमान वनू को गंवाया है,माहौल ऐसा हो गया है दौलत, इज्जत, शोहरत,दोस्ती कुछ काम नहीं आयी कोई भी अस्पताल में एक बेड नहीं दिला पाया। किसी और के साथ यह हादसा न हो इसलिए मेरी सब से प्रार्थना के कोरोना से सतर्क रहे, जान है तो जहान है। अस्पताल पहुंचने पर सिर्फ पैसो की बर्बादी और बेइज्जती  के साथ जान गवानी पड़ती है।हर चीज की ब्लैकमेलिंग चल रही है परिस्थीती सरकार के कंट्रोल से बाहर हो गयी है ।

कब्रिस्तान श्मशान में लाइन लगी है,कम्बखत कब्रिस्तान भी कोविड और नाॅन कोविड बनाकर कर परेशानी और बडाई गयी है,मय्यत लेकर घूमना पड़ रहा है। एक सम्पन्न परिवार की यह दशा हो रही है तो बेचारे गरीब की दशा का अंदाजा लगाना मुश्किल है। हमे संभलने का वक्त मिला है कृपया इसका सदुपयोग किजीये।करोन से बचना आसान है सयम रखे , गाइडलाइन का पालन किजीये। निम हकीम और सोशल मीडिया से मिलने वाली गलत जानकारी से बचे सतर्क रहे।अल्लाह  ईश्वर भगवान  सब की रक्षा करे।

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