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Saturday, November 27, 2021

'भारत माता की जय' से लेकर 'जय हिंद' तक… जानिए जोश भर देने वाले नारों की कहानी

देश के राष्ट्रीय पर्व (National Festival) हों या फिर अपनी मातृभूमि पर गर्व करने का कोई भी दिन- देशभक्ति से जुड़े हुए नारों (Patriotic Slogans) के बिना जश्न (75th Independence Day) अधूरा करता है. राष्ट्रभक्ति से जुड़े हुए यही नारे हैं, जो सीमा पर जवानों के जज्बे को दोगुना कर देते हैं, हमें देश पर गर्व का अनुभव कराते हैं और मातृभूमि के लिए मर-मिटने का जुनून (Most Inspiring Slogans) पैदा करते हैं. ऐसे ही राष्ट्रभक्ति का ज्वार पैदा करने वाले कुछ नारों से जुड़े दिलचस्प तथ्य हम आपको बताते हैं.

‘भारत माता की जय’

देशभक्ति का पर्याय माने जाने वाले इस नारे के बिना राष्ट्रगान अधूरा माना जाता है. इस नारे को सबसे पहले किरन चंद्र बंदोपाध्याय ने भारत माता नाम के नाटक के दौरान दिया था. सबसे पहले इस नाटक का मंचन साल 1873 में हुआ था. बाद में आज़ादी के आंदोलन के दौरान ये नारा और लोकप्रिय हो गया. बताया ये भी जाता है कि भारत माता की जय नारा दरअसल उर्दू में दिए गए नारे ‘मादरेवतन हिंदोस्तान ज़िंदाबाद’ का ही हिंदी रूपांतरण है. ये नारा 1873 में अजीम उल्ला खान ने दिया था, जिसका हिंदी रूपांतरण ‘भारत माता की जय’ के तौर पर हुआ.

‘जय हिंद’

सेना के लोगों में अभिवादन तक के लिए इसी नारे का इस्तेमाल किया जाता है. देशभक्ति का जज्बा पैदा करने वाले इस नारे को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आज़ाद हिंद फौज का ध्येय वाक्य बना लिया गया था. ये नारा आज़ाद हिंद फौज के मेजर आबिद हसन सफरानी ने दिया था. फौज का ध्येय वाक्य बनने के बाद जब देश को आज़ादी मिली तो भी पुलिस और सेना ने इसी नारे को अपना लिया. आज भी इसी नारे का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है.

‘वंदे मातरम’

वंदे मातरम नारा बंगाल के उपन्यासकार और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रहे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने दिया. उन्होंने साल 1882 में पहली बार इस नारे का इस्तेमाल किया था. रवींद्रनाथ टैगोर ने साल 1896 में इंडियन नेशनल कांग्रेस के अधिवेशन में इसका इस्तेमाल किया था. वंदे मातरम हमारा राष्ट्रीय गीत है और देश में राष्ट्रभक्ति का लोकप्रिय संगीत भी है.

‘सत्यमेव जयते’

सत्यमेव जयते का नारा दरअसल एक संस्कृत सूक्ति है. इसे मुंडक उपनिषद से लिया गया है. इसका इस्तेमाल संस्कृत के प्रकांड विद्वान और स्वतंत्रता सेनानी पंडित मदन मोहन मालवीय ने साल 1918 में किया था. इसके बाद ये नारा काफी लोकप्रिय हो गया और इसका इस्तेमाल ध्येय वाक्य के तौर पर किया जाने लगा.

ये भी पढ़ें- जानिए विदेश में पहली बार कब फहराया गया तिरंगा? देश में झंडा फहराते वक्त रखना होता है ध्यान …

‘इंकलाब ज़िंदाबाद’

ये नारा क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह ने साल 1929 में पहली बार इस्तेमाल किया था. उन्होंने 1929 में असेंबली में धमाका करने के बाद इंकलाब ज़िंदाबाद नारे का इस्तेमाल किया था. अब ये नारा क्रांति का प्रतीक बन गया है और लगभग सभी संगठन इसका इस्तेमाल करते हैं.

इसके अलावा भी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नारा ‘करो या मरो’ भी खूब लोकप्रिय हुआ था. उन्होंने साल 1942 में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान ये नारा दिया था. वहीं 70 के दशक में भी एक नारा काफी लोकप्रिय हुआ. ये नारा था- संपूर्ण क्रांति का. संपूर्ण क्रांति के इस नारे को जय प्रकाश नारायण ने दिया था.

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