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Saturday, November 27, 2021

भारतीय इकॉनामी और इकोलॉजी के लिए व्हीकल स्‍क्रैपेज पॉलिसी के क्या मायने हैं?

अमिताभ कांत

हम जिन कारों को चलाते हैं, वे हमारे बारे में बहुत कुछ कहती हैं. जलवायु के प्रति जागरूक, नए युग के नागरिक के रूप में, जब आप अपने वाहन का इग्नीशन शुरू करते हैं, तब क्या आप पृथ्वी के लिए एक स्थायी हरित भविष्य की ओर बढ़ते हैं, साथ ही क्या साथी यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे होते हैं? ग्लोबल वार्मिंग के तेजी से बढ़ते स्तरों ने हमें सोचने पर मजबूर कर दिया है. दुनिया बड़े पैमाने पर जलवायु संकट के कगार पर है. जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र अंतर सरकारी पैनल (आईपीसीसी) बताता है कि ‘मानव प्रभाव ने जलवायु को ऐसी दर से गर्म किया है जो कम से कम पिछले 2000 वर्षों में अभूतपूर्व है.’

जैसा कि मैं वर्तमान में लिख रहा हूं कि कैलिफोर्निया को एक ऐतिहासिक सूखे ने अपनी चपेट में ले लिया है, ग्रीस को जंगल की आग ने तबाह कर दिया है और बाढ़ ने चीन और भारत के राजस्थान, यूपी, एमपी, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में पानी भर दिया है. वैश्विक समुदाय में भयानक संकट साफ दिख रहा है और भारत अत्यंत उच्च जोखिम वाले देशों में से एक है. दुनिया के 30 सबसे प्रदूषित शहरों में से 22 भारत में हैं और भारत में वाहनों का प्रदूषण लगभग 30% कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है. इन्हींत कारणों से भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उत्सर्जक है. भारत में पुराने और अनफिट वाहन, वायु प्रदूषण की गंभीर स्थितियों में अहम योगदान देते हैं. नए वाहनों की तुलना में इन पुराने वाहनों से लगभग 6-7 गुना अधिक उत्सर्जन होता है.

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ऑटोमोबाइल क्षेत्र में अभूतपूर्व उछाल मारते हुए भारत ने वित्ती य वर्ष 2020 में करीब 2.1 करोड़ वाहनों की बिक्री और पिछले दो दशकों में 9.4 फीसदी की वार्षिक वृद्धि दर दर्ज कराई थी. अब तक, भारत में लगभग 33 करोड़ वाहन पंजीकृत हैं. इसलिए, ऐसा संभव है कि 1950 के दशक में पंजीकृत एक वाहन अभी भी सड़क परिवहन अधिकारियों के साथ ‘पंजीकृत’ हो. दुपहिया वाहनों का सबसे बड़ा हिस्सा है, जो सभी वाहनों का लगभग 75% है. इसके बाद कारों / जीपों / टैक्सियों का दूसरा सबसे बड़ा खंड लगभग 13% है. व्हीसकल स्क्रै प पॉलिसी अपने तरह की पहली योजना है जो किसी भी वाहन का पंजीकरण रद्द करने के लिए अपनी तरह का पहला संस्थागत तंत्र है.

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के वाहन डेटाबेस के अनुसार, लगभग एक करोड़ से अधिक वाहन ऐसे हैं जिनके पास वैध फिटनेस या पंजीकरण प्रमाण पत्र नहीं है. व्हीकल स्क्रैपेज पॉलिसी में “जीवन के अंत के वाहनों” को रिटायर करने के लिए एक तंत्र बनाने की परिकल्पना की गई है. ये ऐसे वाहन हैं जो अब सड़कों पर चलने लायक नहीं हैं. इनमें प्रदूषण फैलाने, ईंधन दक्षता में कमी और यात्रियों के लिए सुरक्षा जोखिम जैसे हाई निगेटिव बाहरी पहलू हैं. ये ‘जीवन के अंत’ वाले वाहन स्क्रैपिंग के लिए सबसे उपयुक्त हैं. इसके अलावा, यह अनुमान है कि लगभग 13-17 करोड़ वाहन अगले 10 वर्षों में अपने जीवन स्तर के अंत तक पहुंच जाएंगे.

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प्रधानमंत्री ने जोरदार घोषणा की है कि एक सर्कुलर इकॉनामी हमारी पृथ्वी पर पारिस्थितिक तनाव को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होने जा रही है. केंद्र सरकार ने संसाधन दक्षता को अधिकतम करने और शून्य अपशिष्ट, उत्पादन और खपत के टिकाऊ पैटर्न को बढ़ावा देने के लिए परिणामोन्मुख उत्साह के साथ सरकुलर इकॉनामी के कॉन्सेप्ट की ओर रुख किया है.

एंड ऑफ लाइफ व्हीकल (ईएलवी) के स्क्रैपिंग से न केवल लौह और अलौह धातुएं बल्कि प्लास्टिक, कांच, रबर, कपड़ा आदि जैसी अन्य सामग्री भी मिल सकती हैं. इस सामग्री को रीसाइकल्ड किया जा सकता है, या फिर ऊर्जा की वसूली के लिए ईंधन के रूप में उपयोग में लाया जा सकता है. ईएलवी को रीसाइकल करना, नवीकरणीय संसाधनों के उपयोग के साथ-साथ अपशिष्ट मात्रा को कम करने की दिशा में एक बदलाव पैदा करेगा.

वैश्विक आर्थिक मंदी के दौरान, 2008-09 में कैश फॉर क्लंकर्स और कार अलाउंस रिबेट सिस्टम (CARS) अमेरिकी संघीय सरकार द्वारा इसी तरह की पहल की गई थी. पुराने और ज्यादा ईंधन लेने वाले वाहनों के मालिकों को सरकार ने एक अवसर दिया. इसमें उन्हें नए और अधिक माइलेज देने वाले वाहनों को खरीदने के लिए वित्तीय मदद की गई, ताकि वे अपना कामकाज अच्छे से कर सकें. यूरोपीय संघ हर साल लगभग 9 मिलियन टन ईएलवी उत्पन्न करता है. उत्पादकों को ईएलवी की जिम्मेदारी दी गई है. इसी तरह, जापान में ईएलवी के उपचार को एक बड़ी चुनौती के रूप में पहचाना गया, जिसमें सालाना लगभग 50 लाख ऑटोमोबाइल सड़कों से हट गए. कई विकसित देशों ने सर्कुलर इकॉनामी के सिद्धांतों को अपनाया है, ताकि संसाधन के रूप में ईएलवी का सर्वाधिक उपयोग, भविष्य के ऑटोमोबाइल निर्माण के लिए सुनिश्चित किया जा सके. भारत सरकार की व्हीकल स्क्रैपिंग नीति इन वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप है.

दिल्ली में मायापुरी, मुंबई में कुर्ला, चेन्नई में पुधुपेट्टई, कोलकाता में मल्लिक बाज़ार, विजयवाड़ा में जवाहर ऑटो नगर, गुंटूर में ऑटो नगर – भारत भर के शहरी क्षेत्रों में विशाल व्हीूकल स्क्रैपिंग इकोसिस्टम के उदाहरण हैं. वर्तमान में, भारत में वाहन स्क्रैपिंग के लिए एक असंगठित अनौपचारिक बाजार मौजूद है. इस असंगठित क्षेत्र की वैल्यूि चेन अत्यधिक बिगड़ी हुई है यह श्रमिकों पर आश्रित है और पर्यावरण के अनुकूल नहीं है. इसके अलावा, अनौपचारिक क्षेत्र विघटन और रीसाइकिल के लिए कच्चे तरीकों का उपयोग करता है. इससे उच्च शक्ति वाले स्टील मिश्र धातुओं का पूरा मूल्य और कीमती धातुओं की वसूली का एहसास नहीं होता है. अनौपचारिक और असंगठित वाहन रीसाइकलिंग क्षेत्र में मुख्य रूप से व्यापारी, डिसमेंटलर्स, स्क्रैप डीलर और रीसाइकलर्स शामिल हैं. केंद्र सरकार की नई व्ही,कल स्क्रैपिंग पॉलिसी असंगठित बाजार को बदल देगी और कई अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों को औपचारिक क्षेत्र के दायरे में लाएगी.

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा इन स्क्रैपयार्ड के मौजूदा संचालन का मूल्यांकन और समझने के लिए एक अध्ययन कराया गया. इसमें पाया गया कि एक विशाल सार्वजनिक क्षेत्र को कई मैकेनिक और रिपेयर्स शॉप्सा मिलकर उपयोग कर रहे हैं. वाहन, मुख्य रूप से दलालों, प्रयुक्त कार डीलरों, निजी बस/टैक्सी ऑपरेटर संघों या मैकेनिक की दुकानों से प्राप्त किए जाते हैं और कभी-कभी, यहां तक कि चोरी किए गए वाहनों को भी यहां नष्ट कर दिया जाता है. दलाल आमतौर पर व्हीगकल फायनेंस कंपनियों, बीमा कंपनियों और पुलिस विभागों के माध्यम से होने वाली नीलामी से वाहन प्राप्त करते हैं. वाहनों को नष्ट करना एक विशुद्ध रूप से मैनुअल प्रक्रिया है जिसमें लगभग 3-4 लोग काम करते हैं, जिसमें पुर्जों को नष्ट करने के लिए किसी विशेष मशीनरी का उपयोग नहीं किया जाता है.

सरकार की व्ही कल स्क्रैपिंग पॉलिसी, स्वचालित फिटनेस परीक्षण केंद्र स्थापित करना चाहती है और इसकी दिशा में निवेश बढ़ाने की इच्छा रखती है जिससे वाहनों की ‘सड़क-योग्यता’ की जांच करने वाली अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी. ये केंद्र राज्य सरकारों, निजी क्षेत्र की फर्मों, ऑटोमोबाइल निर्माताओं और अन्य द्वारा सार्वजनिक निजी भागीदारी मॉडल पर स्थापित किए जाएंगे. इससे रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे. साथ ही, देश भर में स्क्रैपिंग सेंटर स्थापित करने के लिए बड़े निवेश भी पाइपलाइन में हैं. इससे भी वैल्यूस चेन में रोजगार के अवसर पैदा होंगे.

स्क्रैपेज नीति का उद्देश्य पुराने वाहनों के मालिकों (जो कि 15 वर्ष से अधिक पुराने हैं) को रद्द किए गए वाहनों के निर्बाध पंजीकरण के माध्यम से प्रोत्साहित करना और जमा का प्रमाण पत्र प्रदान करना है. इस प्रमाणपत्र को नए वाहन खरीदने के लिए भुनाया जा सकता है और ग्राहक को पंजीकरण शुल्क की पूरी छूट मिलेगी. इसके साथ ही MoRTH ने निजी वाहनों के लिए रोड टैक्स पर 25% तक और कमर्शियल वाहनों के लिए 15% तक की छूट के लिए एक मसौदा अधिसूचना जारी की है.

सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) जैसे उद्योग निकाय भी इस पहल का समर्थन करने के लिए आगे आए हैं. MoRTH ने SIAM को स्क्रैप किए गए वाहनों के खिलाफ खरीदे गए नए वाहनों पर 5% छूट के लिए एक एडवाइजरी जारी की है. नीति में 15 वर्ष से अधिक पुराने निजी वाहनों के लिए पुन: पंजीकरण शुल्क बढ़ाने के साथ-साथ 15 वर्ष से अधिक पुराने कमर्शियल वाहनों के लिए फिटनेस प्रमाणन शुल्क बढ़ाने का भी प्रयास किया गया है. राज्यों को प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों पर ‘हरित कर’ लगाने की सलाह दी गई है. आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश ने पहले ही इस दिशा में कदम उठाए हैं. यह नीति उपयोगकर्ता के लिए मौद्रिक लाभ का लक्ष्य भी रखने वाली है. एक आंतरिक विश्लेषण के अनुसार, कार उपयोगकर्ता और ट्रक उपयोगकर्ता 5 वर्षों की अवधि में क्रमशः INR 8 लाख और INR 20 लाख के मौद्रिक लाभ प्राप्त करने के लिए तैयार हैं. व्यापक आर्थिक स्तर पर, यह नीति नए वाहनों की मांग पैदा करने के मामले में एक गेम-चेंजर साबित होगी. कोविड के बाद के परिदृश्य में, ऑटोमोबाइल की बिक्री में 14% की गिरावट आई है. यह नीति, पुराने वाहनों को सेवानिवृत्त करने के माध्यम से, विनिर्माण को बढ़ावा देगी, यात्रियों के लिए नए ऑटोमोबाइल की मांग पैदा करेगी और आने वाले वर्षों में उद्योग के वार्षिक कारोबार में 30% की वृद्धि करेगी.

पुराने से बंधन हटाने की प्रक्रिया के माध्यम से ही हम भारतीय गतिशीलता के लिए एक नए युग की शुरुआत कर सकते हैं, एक ऐसा भविष्य जो जलवायु के प्रति जागरूक, पैदल चलने वालों और यात्रियों के अनुकूल और तकनीकी रूप से सक्षम हो. केंद्र सरकार की व्हीरकल स्क्रैपिंग पॉलिसी या स्वैच्छिक वाहन बेड़े आधुनिकीकरण कार्यक्रम एक लाइनियर से एक सरकुलर इकॉनामी में संक्रमण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होने जा रहा है. यह भारतीय शहरों में वायु प्रदूषण के जोखिम को बहुत कम करेगा, अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा, ऑटोमोबाइल क्षेत्र का आधुनिकीकरण करेगा और ईंधन की मांग को बढ़ाएगा. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पॉलिसी, भारतीय सड़कों को आने वाली कई पीढ़ियों के नागरिकों के लिए एक सुरक्षित स्थान बनाने की दिशा में एक सच्ची भूमिका में होगी.

अमिताभ कांत नीति आयोग के सीईओ हैं. लेख में व्यक्त विचार उनके निजी हैं.

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