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Wednesday, January 19, 2022

सिख दंगों के 36 साल बाद SIT ने कानपुर के बंद कमरे से जुटाए कई अहम सबूत

नई दिल्‍ली. साल 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) की हत्‍या के बाद यूपी का कानपुर (Kanpur) शहर भी सिख दंगों (Sikh Riots) की आग में खूब झुलसा था. दंगों के 36 साल बाद अब एक बार फिर विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी जांच को आगे बढ़ाते हुए एक घर का ताला तोड़ा और वहां से मानव अवशेषों सहित कई सारे अहम सबूत इकट्ठा किए.

इंडियन एक्‍प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक कानपुर के गोविंद नगर इलाके में एक नवंबर 1984 को कारोबारी तेज प्रताप सिंह (45) और उनके बेटे सतपाल सिंह (22) की घर के अंदर हत्या कर दी गई और उनके शव को घर के अंदर ही जला दिया गया था. इस घटना के बाद तेज प्रताप सिंह के परिवार के जो सदस्‍य बचे थे वह पहले एक शरणार्थी शिविर में रहे उसके बाद घर बेचकर पंजाब और दिल्‍ली चले गए. बता दें कि तेज प्रताप सिंह का मकान खरीदने वाला नया मालिक कभी भी उस कमरे में नहीं गया जहां पर इन हत्‍याओं को अंजाम दिया गया था. इस बात की जानकारी मिलने पर एसआईटी ने एक बार फिर उन कमरों की जांच की और कई अहम साक्ष्‍य इकट्ठे किए.

बता दें कि योगी आदित्यनाथ सरकार की ओर से उत्तर प्रदेश में 1984 में हुए सिख दंगों के खिलाफ हुई हिंसा की जांच के लिए गठित एसआईटी की ये पहली जांच है. कानपुर में दिल्ली के बाद सबसे भीषण दंगा हुआ था, जिसमें 127 लोग मारे गए थे. तेज प्रताप सिंह की पत्नी, दूसरे बेटे और बहू के कानपुर छोड़ने के बाद कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 396 (हत्या के साथ डकैती), 436 (घर नष्ट करने का इरादा) और 201 (सबूत नष्ट करना) के तहत मामला दर्ज किया गया था.

इसे भी पढ़ें :- 36 साल पहले इंदिरा की हत्या और उसके बाद की कहानी, प्रत्यक्षदर्शियों की जुबानी…

SIT ने फॉरेंसिक टीम के साथ की कमरों की जांच

बता दें कि एसआईटी ने मंगलवार को फॉरेंसिक टीम के साथ दंगों के चश्‍मदीद की मौजूदगी में तेज सिंह के घर के कमरों की जांच की. पुलिस अधीक्षक और एसआईटी सदस्य बालेंदु भूषण ने बताया कि क्योंकि अपराध स्थल के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है, इसलिए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) के अधिकारियों को बुलाया. जांच में ये पाया गया है कि हत्याएं इसी स्थान पर हुई थी. उन्‍होंने बताया कि मकान का मालिक पहली मंजिल पर रहता है और जिन कमरों में दंगों के समय हत्‍याएं की गई थीं उन्‍हें अभी भी बंदकर के रखा गया है. यहां तक कि कभी भी इन कमरों की सफाई तक नहीं कराई गई है.

इसे भी पढ़ें :- 1984 के सिख विरोधी दंगे : कैसे भड़की हिंसा और उसके बाद क्या-क्या हुआ?

1 नवंबर 1984 को भीड़ ने तेज प्रताप सिंह और उनके बेटे की हत्‍या कर दी थी

बुधवार को एसआईटी ने तेज प्रताप सिंह के जीवित बेटे चरणजीत सिंह (61) का बयान भी मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराया. चरणजीत अपनी पत्नी और परिवार के साथ दिल्ली में रहते हैं. तेज सिंह की पत्नी का कुछ साल पहले निधन हो गया था. एसआईटी की जांच के मुताबिक, 1 नवंबर 1984 को भीड़ ने तेज प्रताप सिंह के घर में घुसकर उन्हें और सतपाल को पकड़ लिया और उनकी हत्‍या कर शव को जला दिया. जिस समय भीड़ उनके घर में घुसी उस वक्‍त परिवार के अन्‍य सदस्‍य छुप गए थे इसलिए वह बच गए. दोनों की हत्या करने के बाद घर में लूटपाट भी की गई थी. जांच अधिकारी ने बताया कि चरणजीत सिंह ने पूरी घटना छुपकर देखी थी और इस हत्‍या में शामिल कुछ लोगों के नाम भी बताए थे.

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