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Monday, November 29, 2021

भारत ही नहीं पूरे इलाके के लिए मुश्किल बन सकता है तालिबान, चीन-ईरान सब जद में

प्रवीण स्वामी

नई दिल्ली.
आतंकी संगठन तालिबान (Taliban) ने लगभग पलक झपकते पूरे अफगानिस्तान (Afghanistan) पर कब्जा कर लिया है. सबसे बुरी बात ये है कि इसकी सबसे बड़ी कीमत देश के युवा चुकाने वाले हैं जो 9/11 अटैक के बाद बड़े हुए. सरकार में भ्रष्टाचार के बावजूद देश में शिक्षा, रोजगार और कमाई के साधन बढ़े थे. तालिबान के शासन में शिक्षा के अधिकार से वंचित रहने वाली महिलाएं सबसे बुरे मानवाधिकार उल्लंघन का शिकार होती हैं. उन्हें बीते सालों में बड़ा फायदा हुआ था. उनके सपने और आशाएं चकनाचूर हो गए हैं.

हालांकि इस घटना से सिर्फ अफगानिस्तान के लोग ही नहीं प्रभावित होने वाले. भारत सहित आसपास के इलाकों और दुनिया में इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है.

कश्मीर पर क्या होगा असर

भारत के लिए अगर प्रभाव की बात करें तो संभव है कि ये बहुत बड़ी घटना साबित न हो. हालांकि मानचित्र में भारत की सीमा पाक अधिकृत कश्मीर के जरिए अफगानिस्तान से मिलती है. ये भारत के लिए अभी एक भौगोलिक बचाव का काम कर सकता है. बीते सालों में पाकिस्तान की तरफ से सीमापार घुसपैठ में कमी आई है. लेकिन इसका कारण ये है कि वो युद्ध से डरता है. अगर पाकिस्तान की तरफ से जिहादी भेजे जाने की घटनाएं कम रहीं तो कश्मीर में हालात सामान्य बने रह सकते हैं.

भारत के लिए कैसे पैदा हो सकती हैं मुश्किलें

अगर भारत के लिए भविष्य की बात करें तो वो कठिन है लेकिन बहुत निश्चित होकर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता. पहली बात ये है कि युनाइटेड नेशंस की कई रिपोर्ट्स में ये कहा जा चुका है कि जैश ए मुहम्मद और लश्कर ए तैयबा जैसे संगठन तालिबान के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. अगर भविष्य में अगर ये ग्रुप अपनी ट्रेनिंग की व्यवस्था और बेस अफगानिस्तान तक फैला लेते हैं, तब वो काफी खतरनाक बन सकते हैं.

वादा करने के बावजूद तालिबान लगातार अलकायदा को पोषित कर रहा है. इसके इस्लामिक स्टेट के साथ भी नजदीकी संबंध हैं. इस्लामिक स्टेट ने भारतीय नागरिकों को भी ट्रेंड किया है. यहां तक कि उन्हें आत्मघाती आतंकी के रूप में भी तैयार किया है.

जिहादी ताकतों को मिलेगी शक्ति

सबसे बड़ी बात ये है कि तालिबान की जीत से पूरे इलाके में जिहादी ताकतों को शह मिलेगी. ठीक उसी तरह जैसे सोवियत के खिलाफ मुजाहिदीनों की जीत के बाद मिली थी.

चीन-ईरान सब पर मुश्किलों की तलवार

अगर आस-पास के क्षेत्रों की बात करें तो निश्चित तौर पर तालिबान का असर पड़ेगा. इसका कारण ये है कि तालिबान में उज्बेक और ताजिक मूल के लोग शामिल हैं. ये लोग मध्य एशिया में आतंकी गतिविधियों में संलिप्त रहे हैं. तालिबान के चीन के जिनजियांग में जिहादियों के साथ भी संबंध हैं. तालिबान के टॉप कमांडर्स में शिया विरोधी विचारों वाले लोग भी हैं. सबसे बुरी बात ये है कि तालिबान के नशा तस्करों और अन्य क्रिमनिल कार्टेल के साथ भी संबंध हैं.

(ये स्टोरी मूल रूप में अंग्रेजी में प्रकाशित हुई है. इसे यहां क्लिक कर पूरा पढ़ा जा सकता है.)

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