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Monday, November 29, 2021

चीन और पाकिस्तान से निपटने के लिए भारतीय सेना का इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप तैयार, जानें कैसे करेगा काम

नई दिल्ली. लगातार बढ़ती चुनौती और बदलते लड़ाई के तरीक़ों को देखते हुए भारतीय सेना भी खुद में लगातार बदलाव कर रही है. थियेटर कमांड बनाकर तीनों सेना के कोआर्डिनेशन और इंट्रीग्रेशन की प्रक्रिया पर काम जारी है, तो वहीं थलसेना ने भी अपने ही अलग-अलग अंगों को एकजुट कर मॉडर्न वॉर के लिए तैयार कर लिया है. मॉडर्न वारफेयर के लिए इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (आईबीजी) पर काफी लंबे समय से चर्चा हो रही थी कि भारतीय सेना के इंफ़ैंट्री, आर्मर्ड, आर्टीलरी, एयर डिफेंस, इंजीनियर्स, लॉजिस्टिक और सपोर्ट यूनिट के माहिर जवानों के साथ एक ऐसा बैटल ग्रुप बनाया जाए जो किसी भी चुनौती से निपट सके. लिहाजा इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप तैयार करने का काम शुरू किया गया.

तकरीबन पिछले दो साल से इन इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप की ट्रेनिंग और साझा अभ्यास भी जारी है, लेकिन इन बैटल ग्रुप की स्थापना का ऑर्डर जारी नहीं हुआ. अब सेना के सूत्रों के मुताबिक़ अगले दो महीने के भीतर ऑर्डर जारी हो सकता है यानी कि अक्टूबर तक इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप स्थापित हो सकता है. ऐसा होने से भारतीय सेना के किसी भी ऑपरेशन को करने की क़ाबिलियत में और इज़ाफ़ा होगा. इसकी शुरुआत सेना की 9वीं और 17वीं कोर से होगी. सेना की 9वीं कोर के कार्य क्षेत्र में पाकिस्तान से लगती पश्चिमी सीमा है, तो वहीं सेना की 17वीं कोर का कार्य क्षेत्र चीन के साथ लगती उत्तरी सीमा है और यहीं पहले दोनों आईबीजी स्थापित की जाएगी.

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सेना के सूत्रों के मुताबिक इसके लिए अक्टूबर तक ऑर्डर निकलने की उम्मीद है. हालांकि इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप सेना के हर कोर में बनाई जाएगी. इस आईबीजी की अगुआई मेजर जनरल रैंक के अधिकारी करेंगे और इनकी रिपोर्टिंग सीधे सेना की कोर को होगी. दूसरे लहजे में कहें, तो आने वाले दिनों में सेना के फॉर्मेशन का अहम हिस्सा रहे डिविजन इस आईबीजी के आने के बाद खत्म हो जाएंगे. ऐसा होने से आईबीजी को सीधे कोर से निर्देश मिलेंगे. इस नई युद्ध रणनीति में बीच की एक लेयर नहीं है. इसलिए सिस्टम तेजी से काम कर करेगा.

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आईबीजी में सैनिकों की संख्या 5000 के क़रीब होगी जो कि एक ब्रिगेड से ज्यादा है और एक डिविज़न से कम. एक ब्रिगेड में 3000 से 3500 तक सैनिक होते है, जबकि एक डिविज़न में सैनिकों की तादाद 10 हज़ार से 12 हज़ार तक होती है. भारतीय सेना का प्लान फिलहाल एक दर्जन से ज्यादा आईबीजी बनाने का है. अलग-अलग टेरेन के लिए आईबीजी की संख्या भी कोर में अलग-अलग होगी. जैसे कि 17वीं कोर में 4 आईबीजी होंगे.

आईबीजी में इंफ़ैंट्री, टैंक, तोप, इंजीनियर्स, लॉजिस्टिक, सपोर्ट यूनिट जैसे अलग-अलग फील्ड के माहिर जवान होंगे जो लड़ाई के जरूरी अपने पूरे साजो-सामान और हथियारों के साथ एकजुट होंगे और कम समय में से किसी भी ऑपरेशन के लिए पूरी तरह से तैयार रहेंगे. अब तक सेना की ये यूनिट अलग-अलग तैनात होती रही है और लड़ाई के वक्त एक साथ आती रही हैं, लेकिन आईबीजी स्थापित होने के बाद से ये शांति के समय में भी साथ ही रहेंगे.

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