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Monday, November 29, 2021

मिजोरम-असम सीमा पर शांति कायम, लेकिन ऐसे विवादों को सुलझाने में वक्त लगता है: CM हिमंत बिस्वा सरमा

नई दिल्ली. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बताया था कि असम-मिजोरम सीमा पर हालिया हिंसा जैसी घटनाएं देश को दर्द देती हैं. सरमा ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि वह 26 जुलाई की घटना के बाद से प्रधानमंत्री के नियमित संपर्क में हैं और उन्हें मौजूदा स्थिति के बारे में नियमित रूप से अपडेट देते रहते हैं. उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने मुझसे कहा ऐसा होने से देश को पीड़ा होती है (इस तरह की घटनाओं से देश आहत है)’.

गौरतलब है कि सीमा पर संघर्ष के बाद मिजोरम पुलिस की गोलीबारी में असम पुलिस के पांच जवान और एक नागरिक की मौत हो गई थी. सरमा ने कहा कि दोनों राज्य सरकारें अब एक-दूसरे से बात कर रही हैं और अमन-चैन के लिए काम कर रही हैं. उन्होंने कहा, ‘हमें अब शांति और इलाज की जरूरत है. हमें आपसी विश्वास बनाने के उपायों की आवश्यकता है.’

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सरमा ने आगे कहा, ‘मिज़ोरम और असम को अब कुछ समय तक अमन बनाने की ज़रूरत है क्योंकि इतना सब होने के बाद सब शांत होने में कुछ समय लगेगा. उसके बाद फिर किसी अंतिम समाधान के बारे में बात हो सकती है. निश्चित रूप से दोनों पक्ष शांति स्थापित करने के लिए कदम बढ़ाएंगे.’ असम-मेघालय सीमा की स्थिति का जिक्र करते हुए सरमा ने कहा कि दोनों राज्य एक-दूसरे से बात कर रहे हैं और मुद्दों को सुलझा रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘सिर्फ 1 या 2 इंच जमीन के लिए रिश्ते खराब नहीं होने चाहिए. आखिर ये भारतीय जमीन हैं.’

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उन्होंने कहा कि विवादित क्षेत्रों के मुद्दे को हल करने के लिए, असम और मेघालय दोनों पांच सिद्धांतों – ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य, प्रशासनिक सुविधा, संवैधानिक सीमा की निकटता और सबसे महत्वपूर्ण लोगों की इच्छा पर जाने के लिए सहमत हुए हैं. असम-नागालैंड सीमा के बारे में सरमा ने कहा कि यह भी निपटान की प्रक्रिया में है.

क्या है विवाद

दरअसल, दोनों राज्यों के अपने-अपने क्षेत्र की सीमा को लेकर अलग-अलग विचार हैं. मिजोरम का मानना है कि उसकी सीमाएं बाहरी प्रभाव से आदिवासियों का संरक्षण करने के लिए 1875 में खींची गई ‘आंतरिक रेखा’ पर है, जबकि असम 1930 के दशक में किये गये एक जिला सीमांकन के आधार पर दावा करता है.

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