26 C
Mumbai
Friday, January 28, 2022

कोरोना वायरस: वैक्सीन का प्रभाव कम क्यों हो रहा, तीसरी डोज का फायदा क्या?

नई दिल्ली. हाल में सामने आए डाटा से पता चलता है कि कोविड वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) का प्रभाव कम हो रहा है. अमेरिका (America) और इजरायल (Israel) में वैक्सीन के प्रभाव में खासतौर पर कमी देखी गई है, लेकिन कोविड (Covid-19) के गंभीर मामलों में वैक्सीन अस्पताल में भर्ती होने से बचाने में काफी प्रभावी है. इजरायल में हुए अध्ययन में पता चला है कि 2021 की शुरुआत में वैक्सीन लगवाने वाले लोगों के संक्रमण का शिकार होने का खतरा बढ़ गया है, जबकि बाद में वैक्सीनेशन (Covid-19 Vaccination) करवाने वाले लोगों में यह खतरा कम है. सवाल ये है कि क्या इन स्थितियों से चिंतित होने की जरूरत है. इसका जवाब है, नहीं. क्योंकि अस्पताल में भर्ती होने से रोकने में वैक्सीन अब भी काफी प्रभावी है. आम तौर पर एक सार्वजनिक टीकाकरण कार्यक्रम को संक्रमण, ट्रांसमिशन और अस्पताल में भर्ती (मौत) से बचाने में कारगर होना चाहिए. शुरुआत में वैक्सीन संक्रमण और हॉस्पिटलाइजेशन के खिलाफ बेहद प्रभावी रही है. अगर इंफेक्शन के खिलाफ वैक्सीन का प्रभाव कम भी होता है, तब भी हॉस्पिटलाइजेशन के खिलाफ वैक्सीन काफी प्रभावी है, क्योंकि हॉस्पिटलाइजेशन की स्थिति में ही स्वास्थ्य व्यवस्था पर सबसे ज्यादा बोझ पड़ता है. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक आंकड़ों से पता चलता है कि हॉस्पिटलाइजेशन के खिलाफ वैक्सीन काफी प्रभावी है. ब्रिटेन में हाल में देखें गए ट्रेंड भी इस ओर इशारा करते हैं. ब्रिटेन में संक्रमण के मामले जनवरी 2021 के शीर्ष स्तर तक पहुंच गए थे, लेकिन मृत्य के मामले पहले की तरह ही 10 फीसद के आसपास रहे.

वैक्सीन के प्रभावों में अंतर क्यों है?

यह कहा जाना कि इम्यून सिस्टम असाधारण तौर पर जटिल है. यह एक बहुत ही छोटी व्याखा होगी, उस इम्युन सिस्टम की जो हमें बीमार करने वाले कई तत्वों से बचाता है. वायरस जब हमारे शरीर को संक्रमित करता है, तो यह मुख्य तौर पर दो जगहों पर पाया जाता है. एक सर्कुलेशन सिस्टम में, जिसके जरिए यह पूरे शरीर में ट्रैवल करता है और दूसरी अलग-अलग प्रकार की कोशिकाओं में, जिनको संक्रमित करके वायरस अपनी संख्या बढ़ाता है. इन दो जगहों पर वायरस का मुकाबला करने के लिए इम्युन सिस्टम दो तरीके अपनाता है. एक एंटीबॉडी है. एंटीबॉडी सर्कुलेट कर रहे वायरस के प्रोटीन की तरह पर लॉक इन हो जाता है. और वायरस को अन्य कोशिकाओं को संक्रमित करने से रोकता है. आगे एंटीबॉडी वायरस के खात्मे का कारण बनता है. एंटीबॉडी को फर्स्ट लाइन डिफेंस भी कहा जाता है. हालांकि वायरस अगर कोशिकाओं को एक बार संक्रमित करने में कामयाब हो जाता है, तो एंटीबॉडी निष्प्रभावी हो जाती है. ऐसे में इम्युन सिस्टम की सेकेंड लाइन डिफेंस एक्टिव हो जाती है.

इंडियन एक्सप्रेस में डॉ तुषार गोरे ने लिखा है कि सेकेंड लाइन डिफेंस सिस्टम को किलर टी-सेल भी कहा जाता है. ये हमारे शरीर में मौजूद उन कोशिकाओं को टारगेट करती हैं, जिन्हें वायरस संक्रमित कर चुका होता है. टी-सेल ऐसी कोशिकाओं को मार देती है. इस तरह वायरस भी मर जाता है. सरल भाषा में ऐसे समझिए कि वायरस संक्रमण तब गंभीर होता है, जब वायरस हमारी कोशिकाओं को पूरी तरह संक्रमित कर देता है और उन पर अपनी पकड़ बना लेता है. ऐसे में मजबूत टी-सेल इम्यून सिस्टम हमारी सुरक्षा करता है, बावजूद कि शरीर का एंटीबॉडी रेस्पांस कमजोर होता है.

टीकाकरण से इम्युन रेस्पांस की दोनों डिफेंस लाइन को मजबूती मिलती है. हालांकि इनके मजबूती हासिल करने के समय में अंतर हो सकता है. समय के साथ एंटीबॉडी का स्तर गिरता है, लेकिन इम्युन सिस्टम के पास मेमोरी भी होती है और जरूरत पड़ने पर यह ऑन-डिमांड एंटीबॉडी जनरेट कर सकता है. लेकिन मेमोरी के जरिए एंटीबॉडी के जनरेट होने में समय लग सकता है. एक कमजोर और देरी से पैदा हुए एंटीबॉडी रेस्पांस के चलते व्यक्ति संक्रमित हो सकता है, लेकिन अगर टी-सेल रेस्पांस मजबूत है, तो व्यक्ति का संक्रमण गंभीर स्थिति में नहीं जाएगा.

इसके अतिरिक्त वैक्सीन का प्रभाव इसलिए भी कम हो सकता है, क्योंकि इसे एक स्ट्रेन को ध्यान में रखकर बनाया गया है और इसे अन्य वैरिएंट का भी मुकाबला करना होता है. यहां तक कि इम्युन सिस्टम रेस्पांस के दोनों तरीकों में भी अंतर हो सकता है. अब वैक्सीन के असर में आ रही गिरावट को ऐसे समझा जा सकता है कि समय के साथ एंटीबॉडी के प्रभाव में आ रही है, लेकिन इम्युन सिस्टम का टी-सेल रेस्पांस मजबूत है और यह हॉस्पिटलाइजेशन से बचाता है.

क्या वैक्सीन की तीसरी डोज से मिलेगी मदद?

दो डोज वाली वैक्सीन की खुराक हॉस्पिटलाइजेशन से बचाने में कारगर है, लेकिन तीसरी डोज मुख्य तौर पर इंफेक्शन के खिलाफ शरीर की प्रतिरोधी क्षमता को मजबूत कर सकती है. हाल में उपलब्ध डाटा के मुताबिक तीसरी डोज के बाद व्यक्ति के एंटीबॉडी लेवल में इजाफा देखा गया है. कुछ देशों ने अपने यहां हाई रिस्क पॉपुलेशन को तीसरी डोज देने का फैसला किया है.

हालांकि एक सवाल ये भी है कि ज्यादातर वैक्सीन कोरोना के वुहान स्ट्रेन पर आधारित हैं. ऐसे में लोगों की चिंता इसके लंबे समय तक प्रभावी होने को लेकर हैं. अगर दो डोज लेने के बाद वैक्सीन की इम्युनिटी खत्म हो जाती है, तो तीसरी डोज कब तक प्रभावी रहेगी. क्या यह नए वैरिएंट्स से बचाव करेगी. एक अन्य महत्वपूर्ण बहस ये भी है कि पहले से टीका लगवा चुके लोगों को तीसरी डोज देना, जबकि कुछ लोगों को एक भी टीका नहीं लगा है. ये उसी तरह है, जैसे पहले लाइफ जैकेट पहने लोगों को लाइफ जैकेट देना बजाय उसके कि जिसके पास लाइफ जैकेट है ही नहीं.

भारत में एक बड़ी आबादी का अभी पूरी तरह टीकाकरण नहीं हुआ है और हॉस्पिटलाइजेशन को लेकर स्थिति संशय से भरी हुई है. साथ ही भारत में अभी ऐसा कोई रिसर्च डाटा उपलब्ध नहीं है, जो यह बताए कि वैक्सीन के दो डोज का प्रभाव कैसा है और तीसरी डोज का लाभ क्या है? ऐसे सवालों और वैक्सीन सप्लाई पर दबाव के बीच लोगों के संपूर्ण टीकाकरण पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए. साथ ही वायरस संक्रमण को रोकने के लिए मास्क, शारीरिक दूरी, साफ सफाई और भीड़ वाली इंडोर जगहों का पर्याप्त हवादार होना जरूरी है.

Related Articles

तिलक नगर पुलिस के निर्भया पथक ने आठ साल के बच्चे को उसके परिजनों से मिलाया

मुंबई। चेंबूर अमर पुल के नीचे परेशान हैरान अकेला इधर उधर भटक रहे एक आठ साले बच्चे को अपने कब्जे में लेकर...

उन्नाव रोड पर रोमांस करते वायरल हुआ पाखी हेगड़े और विक्रांत सिंह राजपूत की तस्वीरें

उन्नाव में चल रही है मनोज टाइगर निर्देशित फ़िल्म 'मझधार' की शूटिंग भोजपुरी सिनेमा के फिटेनस आइकॉन विक्रांत सिंह...

घाटकोपर निवासी एएसआई को राष्ट्रपति पुरस्कार

रवि निषाद/मुंबई। मुंबई के तिलकनगर पुलिस थाने में कार्यरत घाटकोपर निवासी एएसआई लहुजी राउत को उनके द्वारा किए गए सराहनीय कार्यो के...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

22,042FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -

Latest Articles

तिलक नगर पुलिस के निर्भया पथक ने आठ साल के बच्चे को उसके परिजनों से मिलाया

मुंबई। चेंबूर अमर पुल के नीचे परेशान हैरान अकेला इधर उधर भटक रहे एक आठ साले बच्चे को अपने कब्जे में लेकर...

उन्नाव रोड पर रोमांस करते वायरल हुआ पाखी हेगड़े और विक्रांत सिंह राजपूत की तस्वीरें

उन्नाव में चल रही है मनोज टाइगर निर्देशित फ़िल्म 'मझधार' की शूटिंग भोजपुरी सिनेमा के फिटेनस आइकॉन विक्रांत सिंह...

घाटकोपर निवासी एएसआई को राष्ट्रपति पुरस्कार

रवि निषाद/मुंबई। मुंबई के तिलकनगर पुलिस थाने में कार्यरत घाटकोपर निवासी एएसआई लहुजी राउत को उनके द्वारा किए गए सराहनीय कार्यो के...

कोरोनाकाल के बावजूद भी इस पत्रिका के स्थापना दिवस समारोह में नहीं रही कोई हर्षोल्लास की कमी, गूगल मीट पर आयोजन संपन्न

By:R.B.S parmar पटना। सामायिक परिवेश हिंदी पत्रिका का स्थापना दिवस समारोह का ऑनलाईन आयोजन दिनांक 27जनवरी 2022 को संध्या...

celebrating Azadi ka Amrit Mahotsav For empowering women IEA Book of World Record Award से कहां की महिलाकर्मी इस बार हुई सम्मानित,जानें यहाँ…

By:R.B.Singh Parmar मुंबई । महानगर के मुलुंड पश्चिम से संचालित (IEA Book of World Records) International Excellence Award में...