30 C
Mumbai
Wednesday, January 19, 2022

स्‍वतंत्रता दिवस से पहले भारत हासिल करेगा बड़ी कामयाबी, अंतरिक्ष में तैनात करेगा 'निगहबान'

बेंगलुरु. स्‍वतंत्रता दिवस (Independence Day 2021) के जश्‍न की तैयारियों के बीच भारत अपने बहुप्रतीक्षित जियो इमेजिंग उपग्रह जीसैट-1 (Gisat-1) को 12 अगस्‍त को लॉन्च करने जा रहा है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 12 अगस्‍त को जीएसएलवी-एफ 10 के जरिए धरती पर निगरानी रखने वाले इस उपग्रह को लॉन्‍च किया जाएगा. इस उपग्रह का कोडनेम ईओएस-03 (EOS-3) रखा गया है.

ISRO ने जानकारी दी है कि इस उपग्रह का प्रक्षेपण 12 अगस्त को सुबह पांच बजकर 43 मिनट पर किया जाएगा. हालांकि यह मौसम संबंधी स्थिति पर निर्भर करेगा. ईओएस-03 अति उन्नत उपग्रह है, जिसे जीएसएलवी एफ 10 यान की मदद धरती की कक्षा में स्थापित किया जाएगा. अभी तक इस उपग्रह का प्रक्षेपण कोविड-19 महामारी के कारण टला हुआ था.

इससे पहले इस साल 28 फरवरी को इसरो ने 18 छोटे उपग्रहों को भी लॉन्‍च किया था. इनमें देसी और विदेशी उपग्रह शामिल थे.

अंतरिक्ष विभाग के राज्‍य मंत्री जितेंद्र सिंह ने हाल ही में संसद में दावा किया था कि ईओएस-3 पूरे देश की रोजाना 4-5 बार इमेजिंग करने में सक्षम है और जल स्रोतों, फसलों, वनस्पति की स्थिति और वन क्षेत्र परिवर्तन की निगरानी के लिए उपयुक्‍त है. यह बाढ़ और चक्रवात की भी सटीक जानकारी मुहैया कराएगा.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रॉकेट में पहली बार 4 मीटर व्यास वाले ऑगिव-शेप्ड पेलोड फेयरिंग (हीट शील्ड) का इस्तेमाल किया गया है. इसके अलावा उपग्रह में 6-बैंड मल्टीस्पेक्ट्रल दृश्य और नियर-इंफ्रा-रेड के 42-मीटर रिज़ॉल्यूशन के पेलोड इमेजिंग सेंसर होंगे.

जैसैट-1 के प्रक्षेपण के बाद भारत ईओएस-4 या रीसैट 1ए के प्रक्षेपण पर ध्यान केंद्रित करेगा, जो एक रडार इमेजिंग उपग्रह है और दिन-रात तस्वीरें ले सकता है. यह उपग्रह पूरे दिन और सभी मौसमों में समान रूप से चलने की अपनी क्षमता के आधार पर देश की रक्षा में एक रणनीतिक भूमिका निभाने के लिए तैयार है.

Related Articles

बाइक चोर का आरोपी निकला मोबाइल चोर

रवि निषाद/मुंबई। पंतनगर पुलिस की हद से चोरी हुए एक पल्सर 220 बाइक के आरोपी को पुलिस ने करीब एक साल बाद...

घाटकोपर के फुटपाथ हुए फेरी वालो के कब्जे में

बिना परवाना धड़ल्ले से चल रहे अवैध धंधे मुंबई। मनपा एन विभाग का फेरीवालों का उड़नदस्ता मतलब चोर गाडी...

राजस्थान के इस सरकारी अस्पताल में नवजातों और प्रसूताओं पर दौड़ते हैं चूहे, काट लेते हैं अंगुली

Sirohi latest news: कोरोना महामारी के बीच सिरोही के जनाना अस्पताल (Janana Hospital) में चूहों ने आतंक मचा रखा है. जनाना अस्पताल के प्रसूती वार्ड में इन चूहों को प्रसूताओं और नवजातों के ऊपर दौड़ते हुये देखा जा सकता है. कोरोना प्रोटोकॉल की पालना का दावा करने वाले इस अस्पताल में अव्यवस्थाओं का ऐसा आलम है कि यहां आने वाला मरीज यहां ठीक होने की बजाय और बीमार हो जाता है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

22,042FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -

Latest Articles

बाइक चोर का आरोपी निकला मोबाइल चोर

रवि निषाद/मुंबई। पंतनगर पुलिस की हद से चोरी हुए एक पल्सर 220 बाइक के आरोपी को पुलिस ने करीब एक साल बाद...

घाटकोपर के फुटपाथ हुए फेरी वालो के कब्जे में

बिना परवाना धड़ल्ले से चल रहे अवैध धंधे मुंबई। मनपा एन विभाग का फेरीवालों का उड़नदस्ता मतलब चोर गाडी...

राजस्थान के इस सरकारी अस्पताल में नवजातों और प्रसूताओं पर दौड़ते हैं चूहे, काट लेते हैं अंगुली

Sirohi latest news: कोरोना महामारी के बीच सिरोही के जनाना अस्पताल (Janana Hospital) में चूहों ने आतंक मचा रखा है. जनाना अस्पताल के प्रसूती वार्ड में इन चूहों को प्रसूताओं और नवजातों के ऊपर दौड़ते हुये देखा जा सकता है. कोरोना प्रोटोकॉल की पालना का दावा करने वाले इस अस्पताल में अव्यवस्थाओं का ऐसा आलम है कि यहां आने वाला मरीज यहां ठीक होने की बजाय और बीमार हो जाता है.

शेयर बाजार में आपकी हेल्प के लिए SEBI ने उतारा अपना सारथी, यूं आएगा आपके काम

Saarthi Mobile App: SEBI ने निवेशकों को शिक्षा देने वाला एक मोबाइल ऐप सारथी (Saa₹thi) लॉन्च किया. यह ऐप युवा निवेशकों को ऐसी-ऐसी जानकारियां देगा, जिससे कि शेयर बाजार में आपका सफर आसान हो जाएगा.

क्या वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह पर जीवन ढूंढ़ लिया? क्यूरोसिटी को मिले कॉर्बन के संकेत

Scientists find carbon on Red Planet: वैज्ञानिकों ने कहा कि हो सकता है कि बारिश के चलते ये कण सतह पर गिरे और फिर सतह के अंदर मंगल ग्रह की चट्टानों में लंबे समय के लिए सुरक्षित हो गए हों. हालांकि एक और दलील में कहा गया है कि मंगल ग्रह पर मिले कॉर्बन सिग्नेचर अल्ट्रावॉयलेट किरणों और कॉर्बन डाई ऑक्साइड के संपर्क में आने का परिणाम हो सकते हैं, जिसने मंगल ग्रह के वायुमंडल में कॉर्बन पैदा किया हो और फिर ये कण मंगल ग्रह की सतह पर जम गए हों.