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Wednesday, January 19, 2022

ISRO ने लॉन्च किया ‘EOS-03’ उपग्रह, क्रायोजेनिक स्टेज में तकनीकी खराबी से मिशन आंशिक तौर पर फेल

नई दिल्ली. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पृथ्वी की निगरानी करने वाले उपग्रह ‘EOS-03’ को गुरुवार सुबह लॉन्च किया गया. अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट (EOS) की मुख्य विशेषता यह है कि यह चिन्हित किये गए किसी बड़े क्षेत्र क्षेत्र की वास्तविक समय की छवियां लगातार अंतराल पर भेजता रहेगा. यह प्राकृतिक आपदाओं के साथ-साथ किसी भी तरह की अल्पकालिक घटनाओं की त्वरित निगरानी में मदद करेगा.

यह उपग्रह कृषि, वानिकी, जल निकायों के साथ-साथ आपदा चेतावनी, चक्रवात निगरानी, बादल फटने या आंधी-तूफान की निगरानी सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रयोग लाने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी देगा.

श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे परीक्षण स्थल से इस उपग्रह को लॉन्च किया गया. इसे जीएसएलवी (भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान)-एफ10 द्वारा जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा. इसके बाद उपग्रह अपने ऑन-बोर्ड प्रपल्शन प्रणाली का इस्तेमाल करके भूस्थिर कक्षा में पहुंच जाएगा.

देश और इसकी सीमाओं की तस्वीरें वास्तविक समय में होंगी उपलब्ध

यह ऑबजर्वेशन उपग्रह देश और इसकी सीमाओं की तस्वीरें वास्तविक समय पर उपलब्ध कराएगा और प्राकृतिक आपदाओं की शीघ्र निगरानी भी कर सकेगा. ISRO ने कहा था, ‘अत्याधुनिक अर्थ ऑबजर्वेशन उपग्रह EOS-03 को जीएसएलवी-एफ 10 के जरिए भूसमकालिक स्थानांतरण कक्षा (जीटीओ) में स्थापित किया जाएगा. इसके बाद, उपग्रह अपनी प्रणोदक प्रणाली का इस्तेमाल कर अंतिम भू-स्थिर कक्षा में पहुंचेगा.’

इस अभियान का उद्देश्य नियमित अंतराल पर बड़े क्षेत्र की वास्तविक समय पर तस्वीरें उपलब्ध कराना, प्राकृतिक आपदाओं की त्वरित निगरानी करना और कृषि, वनीकरण, जल संसाधनों तथा आपदा चेतावनी प्रदान करना, चक्रवात की निगरानी करना, बादल फटने आदि के बारे में जानकारी प्राप्त करना है. यह उपग्रह 10 साल तक सेवा देगा.

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