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Friday, January 28, 2022

गुजरात में जिग्नेश मेवानी कांग्रेस का 'दलित कार्ड'? राहुल ब्रिगेड को मजबूत करने की कोशिश

हरेश सुतार

अहमदाबाद. गुजरात में अगले साल होने वाले चुनाव से पहले कांग्रेस वहां अपना चेहरा बदलने में जुटी है. अपना हाथ मजबूत करने हेतु लगातार प्रयास कर रही है. वह जिग्नेश मेवानी को पार्टी में शामिल कर दलित कार्ड खेलने जा रही है. फिलहाल भाजपा ने मुख्यमंत्री के साथ पूरे मंत्रिमंडल में बदलाव कर बड़ा दांव खेला है. उसी वक्त कांग्रेस भी कुछ ऐसा करने के मूड में है. जिग्नेश गुजरात के वडगाम से निर्दलीय विधायक के तौर पर चुने गये थे. जिग्नेश ने भाजपा प्रत्याशी को हराकर विधानसभा चुनाव जीता था, जबकि कांग्रेस ने इस सीट पर अपना प्रत्याशी खड़ा ना कर जिग्नेश को एक तरह से अघोषित समर्थन दिया था. शायद यही वजह है कि जिग्नेश आज कांग्रेस का दामन थामने के लिए तैयार हुए हैं.

जिग्नेश और कांग्रेस की दोस्ती पुरानी

भले ही जिग्नेश मेवानी अभी कांग्रेस से जुड़ने जा रहे हों, लेकिन कांग्रेस के साथ उनकी दोस्ती पुरानी है. दोनों के बीच एक खास संबंध रहा है. साल 2017 में हुए चुनाव में भी ये देखने को मिल चुका है. जिग्नेश जहां से निर्दलीय चुनाव जीते थे, वहां पर कांग्रेस ने अपना उमीदवार भी खड़ा नहीं किया था. जिग्नेश भले ही कांग्रेस में नहीं थे, पर प्रदेश की भाजपा सरकार के सामने विरोध पक्ष की तरह ही दिखाई देते हैं.

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जिग्नेश जब साल 2017 में वडगाम सीट से चुनाव लड़े, तब यह फैसला चौंकाने वाला था. अहमदाबाद के जिग्नेश यहां से तकरीबन 150 किलोमीटर दूर वडगाम जाकर राजनीति करना क्यों चाहेंगे? हालांकि अगर राजनीतिक इतिहास की तारीखों को देखें, तो यह सीट कांग्रेस की ही थी. इससे पहले यहा कांग्रेस के विधायक चुने गये थे. ऐसे में कांग्रेस ने अपनी सुरक्षित सीट को छोड़कर जिग्नेश को मौका दिया था. कांग्रेस का यह मास्टरस्ट्रोक था. जिग्नेश को इस सीट से मैदान में उतारकर कांग्रेस ने राजनीतिक समीकरण बिठाया था. कहा जाता है कि इसमें कांग्रेस के गुजरात के एक बड़े नेता ओर वर्तमान में राज्यसभा के सांसद की भी बड़ी भूमिका रही है.

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जिग्नेश मेवानी और कांग्रेस के बीच लिव-इन-रिलेशनशिप थी

जिग्नेश मेवानी गुजरात की वडगाम विधानसभा से निर्दलीय विधायक हैं. अब वह आधिकारिक तौर पर कांग्रेस पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं. जिग्नेश के विधायक बनने में भी कांग्रेस की भूमिका अहम थी. कांग्रेस और जिग्नेश के बीच का रिश्ता लिव-इन रिलेशनशिप जैसा लग रहा है. जिग्नेश ने जब चुनाव लड़ने के लिए वडगाम (एस.सी.) आरक्षित सीट को चुना, तो उसके खिलाफ भाजपा ने चक्रवर्ती को उतारा, लेकिन कांग्रेस ने उमेवर को मैदान में नहीं उतारा. इस प्रकार जिग्नेश वोटों के विभाजन को रोककर और कांग्रेस की कृपा से अच्छी तरह से जीतने में सफल रहे.

खोया हुआ वापस लेना है

गुजरात के इतिहास की बात करें, तो यहां पर बीजेपी और कांग्रेस की सीधी टक्कर रही है. जिसमें देखें, तो दोनों पार्टी के वोटर एक समय पर तय हुआ करते थे. दलित, मुस्लिम और ओबीसी ज्यादातर कांग्रेस के वोटर माने जाते थे और सवर्ण व शिक्षित भाजपा के साथ खड़े रहते थे. पर मोदी के आने के बाद और विकास के मॉडल के चलते कांग्रेस के वोटर टूटे और वो बीजेपी के साथ आ गए. आज कांग्रेस के एक समय के तय वोटर भी बीजेपी के साथ हैं, तो कांग्रेस फिर से अपने खोए हुए दलित वोट को अपने पक्ष में करने हेतु जिग्नेश मेवानी को चेहरा बना सकती है. जिग्नेश मेवानी एक मजबूत नेता हैं और सुर्खियों में कैसे रहा जाय वो बहुत अच्छे से जानते हैं, जिसकी अभी कांग्रेस को जरूरत है.

दलित चेहरे के तौर पर मैदान में उतरेगी कांग्रेस

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस जिग्नेश मेवानी और कन्हैया कुमार को एक प्रमुख दलित चेहरे के रूप में मैदान में उतारेगी. ये रणनीति लंबे समय से कांग्रेस में गुपचुप तरीके से काम कर रहे प्रशांत किशोर के दिमाग की उपज है. प्रशांत राहुल गांधी की वापसी की रणनीति बना रहे हैं और इसी के तहत यह स्वीकारोक्ति की जा रही है. जहां तक ​​गुजरात का संबंध है, गुजरात में 2011 की जनगणना के अनुसार 4074447 अनुसूचित जाति की आबादी है. इस 6.74 फीसदी आबादी के नेता के तौर पर जिग्नेश को पेश किया जाएगा. इसके अलावा न केवल गुजरात में जिग्नेश को, बल्कि कन्हैया कुमार को राष्ट्रीय चेहरे के रूप में पेश किया जाएगा.

मीडिया में भी होगा कांग्रेस का चहेरा

बीजेपी के शासन के दौरान गुजरात की गलियारों में मानो कांग्रेस खो गई है. ऐसे में कांग्रेस अपना चेहरा ढूंढ रही है. हार्दिक पटेल के आने के बाद कुछ समय ऐसा लगा था, पर आंतरिक लड़ाई के चलते वो भी अपना जलवा नहीं दिखा पाए थे. अब कांग्रेस जिग्नेश के चलते मीडिया में अपना चेहरा मजबूत करने के ख्वाब देख रही है.

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जिग्नेश के कांग्रेस में शामिल होने से पार्टी को गुजरात में अनुसूचित जाति के मतदाताओं को आकर्षित करने में मदद मिल सकती है. हालांकि भारतीय जनता पार्टी के कुछ बड़े चेहरे होने के बावजूद जिग्नेश मेवानी लगातार दलितों के मुद्दों पर आवाज बनकर उभर रहे हैं. कांग्रेस जिग्नेश को जमीन पर उतारने की कोशिश करेगी और हार्दिक की जोड़ी एवं पाटीदार कार्ड खेलते हुए एससी वोटबैंक को जोड़ेगी. ऐसे में गुजरात विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव की तुरही फूंकने की कोशिश की जाएगी.

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