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Sunday, September 19, 2021

World Bank Report on Dowry in India: विश्व बैंक की रिपोर्ट, ग्रामीण भारत में 95 प्रतिशत शादियां दहेज देकर होती हैं

नई दिल्ली: भारत में अगर आज से लगभग 30 से 40 वर्ष पहले नजर डालेंगे तो पाएंगे कि देश में कई सारी सामाजिक कुप्रथाएं (Social Evils) प्रचलित थीं. जैसे जैसे शिक्षा का प्रसार हुआ वैसे वैसे समाज कुप्रथाओं से मुक्त होता गया. देश को कुप्रथाओं और मान्यताओं से मुक्त होने में काफी लंबा समय लगा. ऐसा नहीं है कि सभी सामाजिक कुप्रथाएं पूरी तरह से खत्म हो चुकी हैं. आज भी कई सारी ऐसी कुप्रथा प्रचलित हैं जो समाज का हिस्सा बनी हुई हैं. ऐसी ही एक कुप्रथा है दहेज प्रथा (Dowry system). भारत में वर्षों से प्रचलित दहेज प्रथा पर अब विश्व बैंक ने एक बड़ा खुलासा किया है.

विश्व बैंक ने भारत में दहेज प्रथा को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. विश्व बैंक की मानें तो भारत के शहरों की अपेक्षा गांवों में यह प्रथा आज से तेजी से चलाई जा रही है. 1961 से इस प्रथा को गैर कानूनी घोषित किए जाने के बाद भी भारत के गांव इस प्रथा से मुक्त नहीं हो पाए हैं.

भारत के गांवों में दहेज प्रथा की स्थिति को जानने के लिए एक शोध किया गया जिसमें 1960 से लेकर 2008 तक होने वाली करीब 40 हजार शादियों का अध्ययन किया गया. इस अध्ययन में चौंकाने वाली बात सामने आई. शोधकर्ताओं के अनुसार इन 40 हजार शादियों में करीब 95 प्रतिशत शादियां दहेज की शर्त पर की गई थीं. शादियों में या तो दहेज लिया गया था या फिर दहेज दिया गया था.

इससे पहले कई रिपोर्ट में यह भी सामने आ चुका है कि दहेज के कारण कई बार महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा की घटनाएं सामने आती हैं और कई बार दहेज के कारण उसकी मौत तक हो जाती है. शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के लिए भारत के 17 राज्यों की शादियों को आधार बनाया था.

आपको बता दें कि इन्हीं 17 राज्यों में भारत की 96 फीसदी आबादी रहती है. क्योंकि भारत की अधिकांश आबादी गांवों मे निवास करती है इसलिए दहेज प्रथा को करीब से समझने के लिए गांवों का निरीक्षण किया गया.

रिसर्च में यह सामने आया कि 2000 के बाद दूल्हे ने दुल्हन के परिवार को गिफ्ट देने के लिए औसतन पांच हजार रुपये खर्च किए जबकि वहीं दुल्हन के परिवार से दूल्हे के परिवार को मिलने वाली यह रकम लगभग सात गुना अधिक थी. रिपोर्ट के अनुसार 2007 के बाद ग्रामीण भारत में शादी में दिया जाने वाला कुल दहेज वार्षिक घरेलू आय का 14 प्रतिशत था.

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