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Wednesday, January 19, 2022

लेदर के बाद अब कानपुर में मंदिर के फूलों से बनाया जा रहा अनोखा मैटेरियल, नाम होगा फ्लेदर

कानपुर. कानपुर के ब्लॉक ककवन के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का हाल देखने के बाद दुष्यंत कुमार की ग़ज़ल का यह शेर याद आ जाता है – कहाँ तो तय था चराग़ाँ हर एक घर के लिये/कहाँ चराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिये. दरअसल, ककवन के इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में न तो लाइट कटने पर न जेनरेटर की व्यवस्था है और न इन्वर्टर की. ऐसे में अगर रात में किसी का इलाज करना हो तो मोबाइल और मोमबत्ती की रोशनी का ही सहारा है. यह स्थिति तब है जब स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर कर दिए जाने के दावे किए जा रहे हैं और प्रशासनिक अधिकारियों की रिपोर्ट कहती है कि वे हफ्ते में दो बार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) का निरीक्षण करते हैं.

ताजा मामला उस वक्त देखने को मिला, जब ककवन ब्लॉक में दो भाइयों के बीच हुआ विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया. दो पक्षों में जमकर लाठी-डंडे चले. इस खून-खराबे में कई लोग घायल हुए. मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को इलाज के लिए गांव के सीएचसी भेजा. ककवन के इस सीएचसी में लाइट नहीं थी, न ही इन्वर्टर या जेनरेटर की सुविधा थी.

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और तो और वहां रात की ड्यूटी पर कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था. जब सूचना दी गई तो उसके काफी देर बाद डॉक्टर सीएचसी पहुंचे. इस बीच घायलों के खून बहते रहे. आधे घंटे के इंतजार के बाद जब चिकित्सक आए, तो अस्पताल में अंधेरा पसरा था. घायलों के उपचार के लिए डॉक्टर ने अपनी मजबूरी बताई कि यहां न तो लाइट है और न ही जनरेटर चल रहा है. ऐसे में आपलोग अपने-अपने मोबाइल और टॉर्च जला दें, ताकि रोशनी हो सके. तब परिजनों ने मोबाइल की रोशनी दिखाई और डॉक्टर ने घायलों की मरहम-पट्टी की.

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इस पूरे मामले पर सीएससी प्रभारी एसके सिंह से जब बात की गई तो वे बिजली न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ते नजर आए. इस बीच घायलों में से किसी के परिजन ने मोबाइल रोशनी में घायलों का इलाज करने का नजारा अपने मोबाइल में कैद कर लिया.

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