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Tuesday, October 26, 2021

इस शहर के सभी स्कूलों में छात्रों को मुफ्त कंडोम बांटना हुआ अनिवार्य, भड़के परिजन

शिकागो,अमेरिका के शिकागो में पब्लिक स्कूलों के लिए नई पॉलिसी बनाई गई है, जिसमें सभी प्राइवेट स्कूल प्रबंधन को स्कूल छात्रों को मुफ्त में कंडोम उपलब्ध करवाना होगा। शिकागो प्रशासन के इस फैसले के बाद छात्रों के पैरेंट्स बुरी तरह से भड़ग गये हैं और इस फैसले का जमकर विरोध किया जा रहा है। आदेश जारी किया गया है कि सभी प्राइवेट स्कूलों में 10 साल की उम्र से ज्यादा के छात्रों को मुफ्त में कंडोम देना अनिवार्य होगा, जिसको लेकर पैरेंट्स का गुस्सा फूट पड़ा है।

शिकागो के स्कूलों के लिए नई नीति पिछले साल दिसंबर में ही बनाई गई थी, लेकिन स्कूल प्रबंधन इस नीति को लागू नहीं कर पा रहे थे, लेकिन अब जबकि फिर से अमेरिका में स्कूल खुल रहे हैं, तो अब इस नीति का पालन करना सभी प्राइवेट स्कूलों के लिए अनिवार्य होगा।

स्कूलों के लिए बनाई गई नई नीति में कहा गया है कि, जिस स्कूल में ग्रेड पांच या उससे ऊपर के छात्रों को पढ़ाई जाती है, उन स्कूलों में कंडोम उपलब्ध करवाना पूरी तरह अनिवार्य होगा। सीपीसी द्वारा जारी नई नीति में कहा गया है कि ”सभी स्कूलों के प्रतिनिधियों को आदेश दिया जाता है कि शिकागो डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक हेल्थ से मुफ्त में कंडोम लेकर उसे अपने सभी छात्रों को मुफ्त में उपलब्ध करवाएं, ताकि सेक्स संबंधित किसी बीमारी, एचआईवी एड्स इंन्फेक्शन या फिर अनचाहे गर्भ से छात्रों को बचाया जा सके। इसके साथ ही छात्राओं की माहवारी संबंधित हाइजीन प्रोडक्ड भी स्कूलों में मुफ्त में छात्राओं को देने के लिए कहा गया है।

आपको बता दें कि शिकागो अमेरिका का दूसरा सबसे बड़ा शहर है, जहां की आबादी करीब 22 लाख से 25 लाख के बीच है। इस शहर में करीब 600 पब्लिक स्कूल हैं, जो सभी शिकागो पब्लिक स्कूल सिस्टम के अधीन हैं। इनमें से ज्यादातर स्कूलों में पांचवीं क्लास से ऊपर की पढ़ाई होती है और इन सभी स्कूलों में फ्री में कंडोम बांटना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे पहले स्कूलों के प्रिंसिपल को यह तय करने का अधिकार था, कि वो अपने स्कूल में सेक्स एडुकेशन को छात्रों के बीच कैसे ले जाते हैं और छात्रों को सेक्स संबंधित सलाह कैसे देते हैं। लेकिन, अब स्कूलों के लिए नई नीति का निर्धारण किया गया है। जिसके मुताबिक प्राथमिक स्कूलों को शुरू में शिकागो डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक हेल्थ से 250 कंडोम प्राप्त होंगे, जबकि हाई स्कूलों को एक हजार कंडोम मुफ्त में दिए जाएंगे। अगर स्कूलों में कंडोम खत्म हो जाते हैं, तो यह प्रिंसिपल की ड्यूटी होगी कि वो नये कंडोम हेल्थ डिपार्टमेंट से फिर मंगवाएं।

सीपीसी के प्रमुख डॉक्टर केनेथ फॉक्स ने शिकागो सन टाइम्स को दिए इंटरव्यू के दौरान कहा कि ”जवान लोगों को सही और सटीक जानकारी हासिल करने का पूरा अधिकार है और उन्हें अपने स्वास्थ्य की देखभाल के लिए संसाधनों के इस्तेमाल करने का पूरा अधिकार है, साथ ही उनकी जिम्मेदारी है कि वो दूसरे लोगों के स्वास्थ्य का भी देखभाल करें, लिहाजा वो इस नई नीति का पालन करें”। फॉक्स ने कहा कि ये स्कूल की जिम्मेदारी है कि वो इस फैसले के बारे में छात्रों के पैरेंट्स को बताएं, जिसमें कहा गया है छात्रों को कंडोम की सुविधा मुफ्त में और काफी सरल तरीके से उपलब्ध है, और इसके लिए स्कूलों को पैरेंट्स को चिट्ठी लिखकर बताना होगा।” फॉक्स ने कहा, “अनिवार्य रूप से हम जो करना चाहते हैं वह छात्रों को कंडोम उपलब्ध कराना है, जब उन्हें लगता है कि उन्हें उनकी आवश्यकता है।” ‘जब आपके पास वे सुरक्षा नहीं होती है, और उन संसाधनों को उपलब्ध नहीं कराते हैं, तो युवा लोगों के साथ बुरी चीजें होती हैं।”

सीपीसी के इस फैसले के बाद पैरेंट्स के बीच बवाल मच गया है और उन्होंने सीपीसी के इस फैसले पर हैरानी जताई है। पैरेंट्स का कहना है कि आखिर सीपीसी इस तरह के वाहियात फैसले कैसे ले सकता है। और छात्रों को कंडोम कैसे उपलब्ध करवा सकता है। एक पैरेंट्स ने कहा कि ”बच्चे 10 साल, 11 साल या 12 साल के हैं और उन्हें कंडोम क्यों दिया जा रहा है, उन्हें सेक्स संबंधित शिक्षा देना सही बात है, लेकिन इतनी कम उम्र में सेक्स के प्रति बढ़ावा क्यों दिया जा रहा है?” उन्होंने कहा कि ‘मेरे ख्याल से ये एक बहुत बुरा विचार है और छात्रों को इससे काफी नुकसान होने वाला है’। वहीं एक पैरेट ने कहा कि ‘आखिर इस देश को हो क्या गया है कि छोटी उम्र के बच्चों को स्कूल में सेक्स करने के लिए उकसाया जा रहा है, सेक्स एजुकेशन अपनी जगह ठीक है, लेकिन क्या अब 10 साल के बच्चे स्कूल में सेक्स करेंगे?’

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