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Monday, November 29, 2021

पेगासस मामले में जांच के लिए बनेगा विशेषज्ञों का पैनल, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी जानकारी

नई दिल्ली। पेगासस स्पाईवेयर के जरिए कथित तौर पर जासूसी के आरोपों की जांच अब विशेषज्ञों का एक पैनल करेगा। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जानकारी दी है कि वह पेगासस मामले की जांच के लिए विशेषज्ञों की एक समिति का गठन करेगी। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए एक हलफनामे में जासूसी के आरोपों को भी नकारा है। हलफनामे में केंद्र सरकार ने स्पष्ट रूप से सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाएं निराधार मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं।

सुप्रीम कोर्ट की सीजेआई एनवी रमना और जस्टिस सूर्यकांत की खंडपीठ सोमवार को अधिवक्ता एमएल शर्मा, भाकपा सांसद जॉन ब्रिटास, एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के संस्थापक जगदीप छोकर, नरेंद्र मिश्रा, तीन पत्रकारों और एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट में केंद्र ने दो पन्नों के एक संक्षिप्त हलफनामे में कहा कि, ‘यह प्रस्तुत किया जाता है कि मैं उपरोक्त याचिका और अन्य संबंधित याचिकाओं में प्रतिवादियों के खिलाफ लगाए गए किसी भी और सभी आरोपों से स्पष्ट रूप से इनकार करता हूं।’

इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चयन समितियों की सिफारिशों के बावजूद ट्रिब्यूनल में नियुक्ति करने के लिए केंद्र को 10 दिनों का समय दिया है। केंद्र की ओर से पेश एसजी तुषार मेहता से सीजेआई ने कहा कि यह एक सीमित हलफनामा है और आरोपों को संतुष्ट नहीं करता है कि पेगासस का इस्तेमाल किया गया था या नहीं। सीजेआई ने कहा, ‘जब तक आप जानकारी नहीं देते हम सुनवाई नहीं कर सकते। हम आपको विस्तृत हलफनामे के लिए समय दे सकते हैं और समिति का दायरा तय कर सकते हैं।’

केंद्र का प्रतिनिधित्व करने वाले एसजी तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि हम एक संवेदनशील मामले से निपट रहे हैं लेकिन इसे सनसनीखेज बनाने की कोशिश की जा रही है। इस मामले के राष्ट्रीय सुरक्षा निहितार्थ होंगे।

यह विवाद तब सामने आया जब फ्रांसीसी गैर-लाभकारी संस्था फॉरबिडन स्टोरीज और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने 50,000 फोन नंबरों के लीक हुए डेटाबेस को एक्सेस किया, जिन्हें कथित तौर पर पेगासस द्वारा लक्षित किया गया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पेगासस स्पाइवेयर ने 300 से अधिक भारतीय मोबाइल नंबरों को निशाना बनाया, जिनमें 40 पत्रकार, व्यवसायी, एक संवैधानिक प्राधिकरण, तीन विपक्षी नेता और केंद्र सरकार में दो मौजूदा मंत्री शामिल थे। डेटाबेस में कथित तौर पर उन कार्यकर्ताओं की संख्या भी थी, जो भीमा कोरेगांव मामले में आरोपी और कैद हैं।

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