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Friday, July 30, 2021

संपत्ति कर वृद्धि पर दोहरी नीति मुंबईकरों के साथ अन्याय : संजय पांडेय

अगर निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से विचार-विमर्श के बिना टैक्स लगाए जा रहे हैं, तो बीएमसी कौन चलाता है !

मुंबई। भाजपा उत्तर भारतीय मोर्चा के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष संजय पांडेय ने मुंबई में संपत्ति कर की दरों में किसी भी तरह की प्रस्तावित वृद्धि का कड़ा विरोध किया और कर प्रस्ताव पर बीएमसी की दोहरी नीति की तीखी निंदा की। उन्होंने कहा कि शिवसेना द्वारा यह घोषणा की गई थी कि 500 ​​वर्ग फुट से कम की आवासीय इकाइयों के लिए संपत्ति कर माफ किया जाएगा। यह वादा चुनावी जुमला साबित हुआ, और यह मुंबईकरों के साथ धोखाधड़ी साबित हुई। संजय पांडेय ने कहा कि इसके पहले भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर चुनाव के दौरान किए गए उनके वादे पर उनका ध्यान खींचा था। उन्होंने कहा कि हमने पहले भी मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर कहा था कि सरकार को घुमावदार लफ्जों वाले सरकारी प्रस्तावों के पीछे नहीं छिपना चाहिए और अपना वादा पूरा करना चाहिए। राज्य और बीएमसी दोनों में महा विकास आघाड़ी सत्तासीन है। पांडेय ने कहा कि कल ही कई नगरसेवकों ने दावा किया है कि संपत्ति कर में बढ़ोतरी का प्रस्ताव बीएमसी अधिकारियों द्वारा लाया गया है, और अधिकांश निर्वाचित नगरसेवक इसके पक्ष में नहीं हैं, जिसमें महापौर भी शामिल हैं। बीएमसी में विचार विमर्श द्वारा एजेंडा निर्धारित किया जाता है और बीएमसी अधिकारी इसी के अनुसार काम करते हैं। सभी अधिकारी अंततः मुख्यमंत्री के प्रति जवाबदेह होते हैं, जो महा विकास आघाडी सरकार के मुखिया भी हैं। फिर यह कैसे संभव है कि नौकरशाहों ने निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और राज्य सरकार से बिना किसी निर्देश और अनुमोदन के संपत्ति कर नीति पेश की और उसे आगे बढ़ाया?  और अगर ऐसा है तो सवाल यह है कि आखिर बीएमसी को कौन चला रहा है?  क्या यह मुख्यमंत्री, मनपा आयुक्त या शिवसेना के निर्वाचित पार्षद हैं?   नौकरशाही पर दोष मढ़कर मनपा के चुने हुए जनप्रतिनिधि बच नहीं सकते। यह ठाकरे सरकार द्वारा अव्यावहारिक प्रस्ताव देकर अब अपनी खाल बचाने का प्रयास मात्र है। संजय पांडेय ने कहा किप्रस्तावित संपत्ति कर शहर के लिए आर्थिक रूप से बड़ा बोझ होगा, जहां संपत्ति की कीमतें पहले से ही बहुत अधिक हैं। यह मुंबई के नागरिकों के हितों के भी खिलाफ है, जो कोविड -19 महामारी और इसके परिणामस्वरूप लॉकडाउन के कारण आर्थिक कठिनाइयां झेल रहे हैं। सरकार इस तथ्य का संज्ञान लेने में विफल है कि आम आदमी आर्थिक अनिश्चितता, बड़े पैमाने पर आर्थिक मंदी, बेरोजगारी में वृद्धि और महामारी के कारण आर्थिक संकट में है।  कोविड महामारी में पूरी अर्थव्यवस्था तबाह हो गई है। शहर में उद्योग व्यापार बुरी तरह नुकसान झेल रहे हैं । इसके बावजूद सरकार ऐसे मुश्किल समय में आम लोगों को राहत पहुंचाने की अपनी जिम्मेदारी से बच रही है। ऐसे कठिन में मनपा संपत्ति कर में वृद्धि के बारे में सोच भी कैसे सकती है! पांडेय ने कहा किचुनाव के दौरान उद्धव ठाकरे सरकार ने वादा किया था कि संपत्ति कर में राहत दी जाएगी। अपने वादों को पूरा करने के बजाय, बीएमसी मुंबईकरों पर भारी संपत्ति करों का बोझ डालने की योजना पर काम कर रही है। क्या हम यह मान लें कि मनपा आयुक्त या उद्धव ठाकरे के निर्देश के बिना नौकरशाह संपत्ति कर जैसी नीति पर काम कर रहे हैं?  कोविड -19 महामारी से बड़ी संख्या में मुंबईकर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे हैं। संजय पांडेय ने कहा कि ऐसी स्थिति में यह उम्मीद थी कि इस मुद्दे पर मनपा प्रशासन संवेदनशील होगा, लेकिन दुख की बात है कि इसका उल्टा हो रहा है। राज्य की आघाड़ी सरकार को जनता को ध्यान में रखते हुए नीतियां बनानी चाहिए और संपत्ति कर बढ़ाकर ईमानदार करदाताओं को परेशान करने की नीति से बाज आना चाहिए।

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