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Friday, July 30, 2021

जापानी सेना की भयानक सच्चाई, गर्भवती महिलाओं के शरीर में डाले जाते थे जानलेवा वायरस

नई दिल्ली। इतिहास में कई भयानक युद्ध हुए हैं, जिनमें लाखों लोगों की मौत हुई. वहीं युद्ध की विभीषिका की बात करें तो अक्सर लोगों का पहला ध्यान अमेरिका (US) की सेना द्वारा जापान (Japan) के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम (Atomic Bomb) गिराने पर जाता है. वहीं किसी युद्ध में नागरिकों, महिलाओं और बच्चों पर होने वाले अपराधों यानी वार क्राइम (War Crime) के बारे में लोग कम जानते होंगे. एक ऐसे ही वार क्राइम के बारे में आपको बताते हैं जिसे जापान ने अंजाम दिया.

दरअसल, यूनिट 731 को जापान की सेना ने जैविक हथियार (Biological weapons) बनाने के लिए शुरू किया था, ताकि वो दुश्मनों पर इसका इस्तेमाल कर सकें.इसकी सीक्रेट लैब्स में इंसानों के शरीर में खतरनाक वायरस और केमिकल्स डालकर प्रयोग होते थे. इंसानों को इस लैब में ऐसी खौफनाक यातनाएं दी जाती थीं, जिसके बारे में किसी ने सोचा भी नहीं होगा.

महिला कैदियों के साथ जापानी आर्मी जबरदस्ती संबंध बनाकर उन्हें प्रेगनेंट करने के लिए मजबूर करती थी. जिसके बाद गर्भवती महिलाओं के ऊपर वह तरह-तरह के हथियारों का प्रयोग करती थी. इतना ही नहीं, वह उनके शरीर में जानलेवा बीमारियों के जीवाणु भी छोड़ देते थे, सिर्फ ये देखने के लिए की वो कितने दिन तक जिंदा रह पाती है.

अगस्त 1945 में, हिरोशिमा और नागासाकी दोनों पर बमबारी होने के बाद, सोवियत सेना ने मंचूरिया पर हमला किया. इस लड़ाई में जापानी सेना बुरी तरह हारी और यूनिट 731 को आधिकारिक रूप से भंग कर दिया गया था. हालांकि, इस यूनिट में किए गए ज्यादातार प्रयोग को जला दिया गया था. इसके साथ ही जापान ने 13 वर्षों के रिसर्च में पाए गए सभी उपयोगी जानकारी को भी नष्ट कर दिया.

उस दौर में इजिप्ट में एक जानलेवा बीमारी फैल रही थी, जिसका नाम था सिफलिस. जापान ने इस बीमारी का अध्ययन करने के लिए इसके जीवाणु बंदी बनाये हुए कैदियों में डाल दिये थे. इस बीमारी को फैलाने के लिए इससे ग्रसित हुए कैदियों को वह चीन के औरतों के साथ जबरदस्ती संबंध बनाने के लिए भी मजबूर करते थे.

ऐसे ही एक और दर्दनाक प्रयोग की बात करें तो फ्रॉस्टबाइट टेस्टिंग नाम के इस प्रयोग में इंसान के हाथ-पैर को पानी में डुबा दिया जाता था और वो जब तक जम न जाए, तब तक पानी को ठंडा किया जाता था. इसके बाद जमे हुए हाथ-पैरों को गर्म पानी में पिघलाया जाता था, ताकि यह पता लगाया जा सके कि अलग-अलग तापमान का इंसानी शरीर पर किस तरह का प्रभाव पड़ता है.

चीन के पिंगफांग में मौजूद यूनिट 731 खतरनाक प्रयोग करने वाली ये कोई इकलौती लैब नहीं थी. बल्कि चीन में इसकी और भी कई शाखाएं थीं, जिनमें लिंकोउ (Branch 162), मु़डनजियांग (Branch 643), सुनवु (Branch 673) और हैलर (Branch 543) शामिल थीं. हालांकि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद खतरनाक प्रयोग करने का काम रूका तो ये जगहें वीरान हो गईं. अब तो इनमें से कई जगहों पर लोग घूमने के लिहाज से भी आते हैं. चीनी वेबसाइट Ecns wire के मुताबिक अभी पिछले हफ्ते ही यूनिट 731 की उन खौफनाक जुल्मों को दिखाती एक प्रदर्शनी लगाई गई थी.

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